बारिश के मौसम पर कविता : वर्षा रानी की सौगातें
बादलों से उतरी झमाझम बौछार से।
अंबर से धरती पर बरसते प्यार से।
प्रकृति के हरियालिवी श्रृंगार से।
गुदगुदाती पवन के संग नशीली फुहार से।
कौन है जिसका न झूम जाए मन ।1।
नदियां व झील, सरोवर लगे भरने।
नया जीवन पा उमंग उठे झरने।
झूम उठे सब वृक्ष-लता नहा धोकर,
पक्षियों के दल लगे गुंजन करने।
प्रकृति का हर ओर-छोर आनंद मगन।2।
नए अंकुर खेतों का श्रृंगार करें।
कृषक मन में नई उमंगे उभरें।
मौसम की अनुकूलताओं के वरदानों से
मनकामनाओं की पूर्ति की फसलें लहरें।
वर्षा रानी की सौगातों से बिखरा चहुं ओर नया जीवन।3।
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय के डीन पद पर 1991 से 1993 तक रहे। डॉ. सिंगी की चारों वेद, गीता, उपनिषद्, अठारह पुराण पर पुस्तकें प्रकाशित हुईं। उनके तीन कविता संग्रह इन्द्रधनुष, लहरें, प्रवाह के अतिरिक्त जीवन उपयोगी सूत्र पर 'अच्छा जीवन जीने के लिए' एक पुस्तक का प्रकाशन भी हुआ।....
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