Hanuman Chalisa

नई कविता : करुणा...

Updated: मंगलवार, 19 दिसंबर 2017 (14:24 IST)
रोज देखता हूं
निश्चित समय पर
उस अर्द्धविक्षिप्त अधेड़ महिला को
जो निकलती है 
मेरे घर के सामने से
कटोरा लिए हाथ में।
 
उपजती है मन में पीड़ा
आता है कारुणिक भाव भी 
और होती है यह जिज्ञासा प्रबल
कि जानूं-समझूं उसके हालातों को।
 
सुन रखा था मैंने
अनेक लोगों से 
उसके स्वाभिमान के बारे में।
 
अंतत: एक दिन
रोक ही लिया मैंने उसे।
 
पूछने पर बताया उसने 
जान बचाकर जलती हुई 
भागी थी ससुराल से 
कर अपनी दुधमुंही बेटी को।
 
उमड़ी थी तब 
अनेक रिश्तों में करुणा 
अनचाही वासनायुक्त हमदर्दी
ठुकरा दिया था जिसे मैंने।
 
अब तो अरसा बीत गया है
झोपड़ी में रहती हूं 
भीख मांगकर
बेटी को पढ़ाती हूं।
इस साल जब नर्स बन जाएगी वह
ले सकूंगी चैन की अंतिम सांस।
 
बोली वह- बाबू, 
आजकल करुणा, दया, हमदर्दी 
सब दिखावा है 
स्वारथ का पिटारा है।
 
मय रहते समझ गई थी इसे 
इसीलिए हमदर्दी की नहीं 
स्वाभिमान की भीख मांगती हूं 
और आत्मसम्मान से जीती हूं। 
लेखक के बारे में
देवेन्द्र सोनी

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

आस्था और अनुशासन का अद्भुत संगम है कांवड़ यात्रा

निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए तैयार उत्तर प्रदेश

फ्रेंडशिप डे 2026: दोस्ती पर बॉलीवुड के 25 सदाबहार गाने, हर दोस्त को आएंगे पसंद

फ्रेंडशिप डे 2026: दोस्ती कब बदल जाती है प्यार में? जानिए 7 बड़े संकेत

अगला लेख