Hanuman Chalisa

कविता : बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

Updated: बुधवार, 28 दिसंबर 2016 (12:04 IST)
तुम नारी हो, तुम दुर्गा हो
नारी तुम सरस्वती
नारी तुम हो लक्ष्मी
नारी तुम भागीरथी।
 
तुम हो गंगा, तुम हो यमुना
तुम नदिया की धारा
तुम बिन न हो पाए
इस दुनिया में उजियारा।
 
इस सृष्टि की तुम हो जननी
त्याग की तुम परिभाषा
अपना सर्वस्व त्याग किया तुमने
कभी न की कोई अभिलाषा।
 
देती आई अग्निपरीक्षा
वर्षों से तुम सीता बनकर
विष का प्याला तुमने पिया
कृष्ण की प्यारी मीरा बनकर।
 
तुम कष्टों की धारणी बनकर
जीवन है हमको दे जाती
खुद कांटों का जीवन जीकर
गुलाब बन परिवार को महकाती।
 
पर यह पुरुष-प्रधान समाज
अभी तक तुमको न समझ पाया
कभी निर्भया, कभी शाहबानो बना
हमेशा है तुमको तड़पाया।
 
भ्रूण हत्या कर तुम्हारी
सृष्टि विनाश का निर्मम खेल रचा
बेटियों को करके अपमानित
अंधकार का पथ प्रशस्त किया।
 
तो हे मानव, यदि अंधकार से उजाले में आना है
तो बेटियों को पढ़ाना है, बेटियों को बचाना है
महिलाओं का सशक्तीकरण कर
सृ‍ष्टि के सुंदरतम निर्माण का
एक नया अध्याय लिख जाना है। 
लेखक के बारे में
राकेशधर द्विवेदी
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

सभी देखें

Azad Jayanti 2026: जयंती विशेष: चन्द्रशेखर आजाद के जीवन की ऐसी घटनाएं, जिन्हें हर युवा को जानना चाहिए

लोकमान्य तिलक जयंती 2026: जीवन परिचय, इतिहास, महत्व और अनसुने तथ्य

ब्रिटिश सरकार न सरस्वती प्रतिमा वापस करेगी, न कोहिनूर हीरा

बारिश में कुछ टेस्टी खाने का है मन? ट्राई करें ये 5 मानसून स्पेशल रेसिपीज

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

अगला लेख