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हरिवंश राय बच्‍चन की सबसे लोकप्रिय कविता 'मधुशाला'

Updated: सोमवार, 18 जनवरी 2021 (09:02 IST)
harivansh rai bachchan poem
 
हिन्दी काव्य प्रेमियों में हरिवंश राय बच्‍चन सबसे अधिक प्रिय कवि रहे हैं और सर्वप्रथम 1935 में प्रकाशित उनकी 'मधुशाला' आज भी लोकप्रियता के सर्वोच्च शिखर पर है। यहां पढ़ें हरिवंश राय बच्‍चन की सबसे लोकप्रिय कविता- 
 
-हरिवंश राय बच्‍चन 
 
मदिरालय जाने को घर से 
चलता है पीनेवाला, 
'किस पथ से जाऊं?' 
असमंजस में है वह भोलाभाला; 
अलग-अलग पथ बतलाते सब 
पर मैं यह बतलाता हूं-
'राह पकड़ तू एक चला चल, 
पा जाएगा मधुशाला'।
 
पौधे आज बने हैं साकी 
ले-ले फूलों का प्याला, 
भरी हुई है जिनके अंदर 
परिमल-मधु-सुरभित हाला, 
मांग-मांगकर भ्रमरों के दल 
रस की मदिरा पीते हैं, 
झूम-झपक मद-झंपित होते, 
उपवन क्या है मधुशाला!
 
एक तरह से सबका स्वागत 
करती है साकीबाला, 
अज्ञ-विज्ञ में है क्या अंतर 
हो जाने पर मतवाला, 
रंक-राव में भेद हुआ है 
कभी नहीं मदिरालय में, 
साम्यवाद की प्रथम प्रचारक 
है यह मेरी मधुशाला।
 
छोटे-से जीवन में कितना 
प्यार करूं, पी लूं हाला, 
आने के ही साथ जगत में 
कहलाया 'जानेवाला', 
स्वागत के ही साथ विदा की 
होती देखी तैयारी, 
बंद लगी होने खुलते ही 
मेरी जीवन-मधुशाला!

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