biodatamaker

होली की कविता: वो होली कोई लौटा दो

Updated: रविवार, 13 मार्च 2022 (13:27 IST)
बिसरी सी होली मेरी
वापिस कोई लौटा दो
वो मस्ती अबीर गुलाल
वापिस कोई लौटा दो

सज गए बाजार
चीनी पिचकारी से
केमिकल से भरी हुई
रंगीन सी क्यारी से
पर इनमें टेसू वाली
चमक कहां से लाऊं मैं
रंगों की धार में वो
गमक कहां से लाऊं मैं
अपनों का प्यार दुलार
वापिस कोई लौटा दो
वो मस्ती अबीर गुलाल
वापिस कोई लौटा दो

मनती तो होली
यहां भी सोसायटी में
मिलते हैं सारे
एक दूसरे से हाई टी में
पकवान होली के
बनकर यहां भी आएंगे
रेडीमेड गुझिया हम
सब यहां भी खाएंगे
अम्मां की गुझिया
और कचौड़ी कोई लौटा दो
वो मस्ती अबीर गुलाल
वापिस कोई लौटा दो

नकली मुस्कानों को
ओढ़े रंग लगाते हैं
उथले रिश्तों सब
गहरापन जतलाते हैं
वो मोहल्ले वाली
चहक कहां से लाऊं मैं
ठंडाई दही बड़े की
महक कहां से लाऊं मैं
भाभी की गालियों वाली
होली कोई लौटा दो
वो मस्ती अबीर गुलाल
वापिस कोई लौटा दो

तृप्ति मिश्रा

परिचय: समकालीन साहित्यकारों में सामाजिक विडम्बनाओं को उजागर करती लेखनी के लिए जानी जाने वाली, महू मध्यप्रदेश की लेखिका एवं कवियित्री तृप्ति मिश्रा साहित्य के साथ लोकगायन को भी संरक्षित कर रही हैं। साथ ही 17 से अधिक वर्षों से मिट्टी के गणेश पर निःशुल्क कार्यशालाएं करती आई हैं। अपने कार्यों के लिए इन्होंने अनेक सम्मान प्राप्त किए हैं।
लेखक के बारे में
तृप्ति मिश्रा
Tripti Mishra.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

नया भारत, नई उड़ान: मोदी युग में आत्मविश्वास का नया शिखर

17 सितंबर जन्मदिन पर विशेष: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में 25 दिलचस्प बातें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

अगला लेख