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अब इन कंडों की होली हो...

Updated: शनिवार, 7 मार्च 2020 (22:30 IST)
होली हो ओछी राजनीति की, टुच्चे बयानों की होली हो। 
येन-केन सत्ता हथियाने के बेशर्म अरमानों की होली हो।।

होली हो अच्छी चलती सरकारों को ठेस लगाने वालों की। 
होली हो सांप्रदायिकता के दानव को फिर-फिर से जगाने वालों की।।

अच्छी चलती अर्थव्यवस्था में निराशा का मंत्र फूंकने वालों की। 
विदेशी मीडिया में अपने देश की थाली में ही थूकने वालों की।।

विघ्न संतोषी, सत्ता लोभी इन असुरों के ये सब घिनौने हथकंडे हैं। 
इन्हें जलाओ होली पर, ये ही इनके मुंह से निकले गोबर के कंडे हैं।।

लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें

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