biodatamaker

कविता : कागज का रावण

Updated: बुधवार, 17 अक्टूबर 2018 (16:51 IST)
दुष्कर्म वृत्ति से
राम का भारत शर्मिंदा है।
आज एक नहीं
लाखों रावण ज़िंदा हैं।
 
बेरोज़गारी का रावण
प्रतिभाओं को निगल रहा।
जातिवाद का रावण
वैमनस्य पैदा कर रहा।
 
कालेधन के रावण से
पूंजीपतियों के हौंसले बुलंद हैं।
महंगाई के रावण से
दाल में तड़का हुआ बंद है।
 
भ्रष्टाचार का रावण
नैतिकता को मात कर रहा।
गुंडे-मवाली वाला तंत्र
राष्ट्र के साथ घात कर रहा।
 
हर चेहरे और सोच में
एक रावण पल रहा।
महज़ दिखावे के लिए
काग़ज़ का रावण जल रहा।
 
अब श्री राम को पुनः
धरा पर आना होगा।
लाखों रावणों का वध कर
रामराज्य लाना होगा।
लेखक के बारे में
देवेंद्रराज सुथार

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है...

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

अगला लेख