ramcharitmanas

कविता : भावनाओं का निर्मल सलिल

Updated: बुधवार, 9 मई 2018 (16:16 IST)
डॉ. रूपेश जैन 'राहत'
 
भावनाओं का निर्मल सलिल
हृदय से गुजरते ही
दर्द की आग में उबल पड़ता है।
 
और निष्क्रिय मस्तिस्क फिर
वापस पीछे धकेलते हुए
शरीर निष्प्राण सम कर देता है।
 
हर डगर यूँ तो कठिन है
पर जब हालात साथ छोड़ते हैं
तब ये और भी दूभर हो जाती है।
 
फिर भी घोर तिमिर में
उम्मीद की किरण है जीवित
इस अबुझ जीवन सफ़र में।

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है...

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

अगला लेख