Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

कविता : भावनाओं का निर्मल सलिल

डॉ. रूपेश जैन 'राहत'
 
भावनाओं का निर्मल सलिल
हृदय से गुजरते ही
दर्द की आग में उबल पड़ता है।
 
और निष्क्रिय मस्तिस्क फिर
वापस पीछे धकेलते हुए
शरीर निष्प्राण सम कर देता है।
 
हर डगर यूँ तो कठिन है
पर जब हालात साथ छोड़ते हैं
तब ये और भी दूभर हो जाती है।
 
फिर भी घोर तिमिर में
उम्मीद की किरण है जीवित
इस अबुझ जीवन सफ़र में।

Show comments

सभी देखें

नशे की लत से उबरने के लिए कौनसी थेरेपी और कदम होते हैं सबसे असरदार

बारिश के मौसम में जरूर पिएं ये 5 हेल्दी ड्रिंक्स, शरीर को देंगे इम्युनिटी, एनर्जी और अंदरूनी गर्माहट

डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय, मच्छरों से ऐसे करें खुद की सुरक्षा

Hiccups Relief Tips: बार-बार हिचकी क्यों आती है? जानें कारण और आसान उपचार

बरसात के मौसम में ये 5 आसान योगासन कर सकते हैं आपकी इम्युनिटी की रक्षा

सभी देखें

तीखा सामाजिक-आर्थिक व्यंग्य: दो जून की रोटी

Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

ईरान युद्ध से अमेरिका का सुपर पॉवर तमगा डगमगाया

पुण्यतिथि विशेष: स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय और खास बातें

BP Control Tips: हाई ब्लडप्रेशर कम करने के घरेलू उपाय

अगला लेख