sundarkand

हिन्दी कविता : अग्निकुंड

Updated: शुक्रवार, 24 नवंबर 2017 (12:07 IST)
-पंकज सिंह
 
शीशे ने शीशा दिखलाया,
बवाल शीशे ने मचाया। 
संजय क्या कर डाला, 
दुर्योधन को पूज डाला।
 
इतराता है फिर रहा, 
खिलजी मदमस्त हो रहा।
नाच-गाना दिखाना था, 
पद्मावती ना चुनना था।
 
राजस्थान की धरोहर है, 
सतीत्व का जौहर है। 
कानूनी भाषा गढ़ रहा, 
कहानी है कह रहा।
 
शीशा बाद में आया, 
कैसे था चेहरा दिखलाया। 
इज्जत की कहानी है, 
पुरखों से जानी है।
 
शांतिकाल चल रहा, 
युद्ध नहीं डरा रहा। 
घिरा हुआ घर होता,
दुश्मन आंख उठाता दिखता।
 
गर्म खून नहीं खौलता,
अग्निकुंड नहीं जलता।
नाच-गाना तुझे दिखता, 
कौन गिरा भूल जाता।
 
कहानी ही रहने देता,
लीला अपनी ना दिखाता। 
बैठी राख ना उड़ाता,
अग्निकुंड ना जलता।

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है...

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

अगला लेख