sawan somwar

नज़्म : ख़यालों के स्वेटर

Updated: शनिवार, 6 जून 2020 (19:06 IST)
- अभिषेक कुमार अम्बर
 
घटाएं आज बढ़ती जा रही हैं
दिखाने पर्वतों को रोब अपना
हवाओं को भी साथ अपने लिया है।
खड़े हैं तान कर सीने को पर्वत
एक दूसरे का हाथ थामे
कि अब घेराव पूरा हो गया है
गरजने लग गई है काली बदली
सुनहरे पर्वतों के रंग फीके पढ़ गए हैं
मटमैली हुई जाती है उजली-उजली पिंडर
वही कुछ दूर पल्ली बस्तियों में
लाल पीले नीले उजाले हो गए हैं
कि जैसे काली-काली चुन्नी यों पर
कोई सितारों की कढ़ाई कर गया हो
दरीचे से मैं बैठा देखता हूं
कि दुनिया शांत होती जा रही है
कि जैसे बुद्ध का वरदान हो ये
और मैं अपने ज़ेहन में ख़यालों के स्वेटर बुन रहा हूं।

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

भारत की विभिन्नताओं में समाहित है अटूट अभिन्नता!

स्पेन में मोरक्को से घुसपैठ, यूरोपीय संघ में मचा हड़कंप

दादाजी की याद में पोती की पाती, पढ़कर आंखें भी नम होगी, उर्जा भी मिलेगी

क्यों मनाया जाता है विश्व आदिवासी दिवस? जानिए इतिहास और इसका महत्व

अभय छजलानी, पत्रकारिता के तपस्वी साधक

अगला लेख