suvichar

दीपावली पर कविता : एक प्रार्थना

Updated: शनिवार, 29 अक्टूबर 2016 (15:23 IST)
एक शरीर पड़ा होगा
ऑपरेशन थिएटर में
बेहोश असहाय-सा
कुछ उपकरण लगे होंगे
शरीर के चारों ओर।
 

 
डॉक्टर एप्रन पहने
ऑपरेशन थिएटर में
घुस रहे होंगे बचते हुए
अपने लोगों की प्रश्न
पूछती निगाहों से
लाल बल्ब जला होगा।
 
बाहर सभी रिश्ते
दुआ कर रहे होंगे
कुछ नमाज
कुछ प्रार्थनाएं
कुछ अरदास
गूंज रही होंगी।
 
सभी रिश्तों के मन में
दिलासा देते हुए
एक-दूसरे को
कुछ भावुक
कुछ उदास
कुछ व्यग्र
कुछ व्यथित
कुछ भावहीन
बैठे होंगे बेंचों पर।
 
एक रिश्ता जो
जन्मों से जुड़ा है
उसके भीतर
उठ रहा होगा
व्यथा और दु:ख
का उफनता समुद्र।
 
फिर भी शांत
चिंतातुर अश्रुमिश्रित
भावुक आंखें
दे रही होंगी सबको
भावुक दिलासा
सब ठीक होगा।
 
अंदर बेहोश पड़े
भावहीन शरीर पर
डॉक्टर के औजार
चल रहे होंगे।
 
और मैं शांत स्थिर
अविचल मन से
करता रहा एक प्रार्थना
मां उस बेहोश शरीर को
कर दो पुन: जीवंत।
 
उत्साह व उमंग से पूर्ण
और इस दिवाली को
करो शुभ ज्योतिर्मय।
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नई स्टडी: एंथोसायनिन से घट सकता है हृदय रोग और डायबिटीज का खतरा, जानिए कैसे

मानसून में बालों का झड़ना और चेहरे की चिपचिपाहट होगी गायब, बस डेली रूटीन में शामिल करें ये 5 लाइफस्टाइल टिप्स

सावधान! थाली में रखा पनीर असली है या वेजिटेबल ऑयल से बना नकली? 2 मिनट के इस टेस्ट से जानें सच्चाई

कांवड़ यात्रा : ‘बोल बम’ का सनातन संदेश

भारत की विभिन्नताओं में समाहित है अटूट अभिन्नता!

अगला लेख