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तीन तलाक़ को तलाक़...

Updated: सोमवार, 5 अगस्त 2019 (09:09 IST)
तीन तलाक़ कानून अन्त है एक कुप्रथा का। 
अन्याय से पीड़ित, बेबस, अबलाओं की व्यथा का।।

हर जागरूक युवक भी समझता था, यह बीते युग की कलंक कहानी है। 
अन्यायी है, अतार्किक है, धर्म के ठेकेदारों की मनमानी है।।

जाने कब की चली थी रूढ़ि यह, लांछन थी एक बेबस समाज पर। 
अंधी तलवार सी दकियानूसी ज़माने की, लटकी थी मुस्लिम युवतियों के आज पर।।

लगभग सारे मुस्लिम देश कब के, मुक्त हो चुके थे इस अपयश से। 
भारतीय अबलाएं मांगती थी रोकर निजात इस कुप्रथा कर्कश से।।

बेबस महिलाओं के सुख का अब चाहे जब न क्रूर हरण होगा। 
क़ानूनी संरक्षण में निश्चय ही उनका सच्चा सशक्तिकरण होगा।।
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें

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