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मार्मिक कविता : असहाय, बेबस ललनाएं

Updated: सोमवार, 13 अगस्त 2018 (11:33 IST)
कन्या पूजन के इस देश में कितनी ललनाएं रुआंसी। 
कितने हो रहे मुजफ्फरपुर/देवरिया, किस किस को दोगे फांसी ।।1।। 
 
कितने संत/महंत दोगले, कभी शंका न हुई जिनकी नीयत पर। 
बनकर ग्रहण लगे जघन्य से, कितनी चन्द्र-धवल अस्मत पर ।।2।। 
 
कितने छद्म समाजसेवी, अफसर, नेता, मिलजुलकर षड़यंत्रकारी । 
असहाय, बेबस, अबोध ललनाएं अनगिन, हवस का जिनकी ग्रास बनी बेचारी ।। 3।। 
 
जलेंगी सहानुभूति की मोमबत्तियां अब, कुछ समय तो टिमटिमाएंगी। 
पर प्रभावशालियों के हथकण्डों के झोंको से, कुछ समय बाद बुझ जाएंगी ।।4।।
 
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें

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