sawan somwar

नई कविता : एहसास...

Updated: शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017 (11:40 IST)
- देवेंन्द्र सोनी
 
 
एक एहसास
रोज होता है मुझे
सुबह उठते ही
घर की मुंडेर पर कुछ
दाना-पानी रखने का।
 
होता है यह एहसास
इसलिए भी कि-
भोर होते ही
पक्षियों का कलरव
मुझे चेता जाता है।
 
अपने नन्हे बच्चों के साथ
चिंचियाते, गुटर-गुं करते
मेरे ये मित्र 
आते ही हैं मुंडेर पर मेरी
यह आशा लिए कि
मिलेगा उन्हें जरूर यहां
भरपेट दाना-पानी।
 
झरोखे से देखता हूं मैं छुपकर
उनका रोमांचित कर देने वाला
कलरव।
 
लड़ते-झगड़ते 
फुर्र से यहां-वहां बैठते
एक-दूजे से छीना-झपटी करते
आनंदित हो जाता हूं
जब देखता हूं
चिड़िया को अपने 
नन्हे की चोंच में
रखते हुए दाना।
 
मानता कहां है चिड़ा भी
रह-रहकर जताता है
प्यार अपना।
 
यही दृश्य, यही एहसास
देता है सुकून
भर देता है मन में
ऊर्जा, आत्मविश्वास
और देता है प्रेरणा, 
कि- रे मन तू
करता है क्यों चिंता
रखवाला है न 
हम सबका-
वह ईश्वर!
 
उन बेजुबान पक्षियों की तरह
ही तू कर्म तो कर
निश्चित ही होगा 
फलित 
वह भी।

 
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

मानसून में बालों का झड़ना और चेहरे की चिपचिपाहट होगी गायब, बस डेली रूटीन में शामिल करें ये 5 लाइफस्टाइल टिप्स

सावधान! थाली में रखा पनीर असली है या वेजिटेबल ऑयल से बना नकली? 2 मिनट के इस टेस्ट से जानें सच्चाई

कांवड़ यात्रा : ‘बोल बम’ का सनातन संदेश

भारत की विभिन्नताओं में समाहित है अटूट अभिन्नता!

स्पेन में मोरक्को से घुसपैठ, यूरोपीय संघ में मचा हड़कंप

अगला लेख