dharma sangrah
✕

मत आना प्रभु ! अब अवतार लेकर...

Updated: मंगलवार, 19 सितम्बर 2017 (11:26 IST)
भारत का आध्यात्मिक जीवन संवरा 
  वेद, उपनिषद, पुराणों से। 
हिमालयी तपस्या-स्थलों से,
  पवित्रम तीरथ स्थानों से।। 
वाल्मीकि, शंकराचार्य से,
  गौतम बुद्ध, महावीर से। 
नानक, रामकृष्ण, नरेन्द्र से,
  तुलसी, सूर, कबीर से  ।। 
बौद्ध, जैन, सनातन जीवन-धारा, 
  बहती रही यहाँ निःशंक। 
हाय ! धूर्त बाबाओं के कारनामों से 
  लगा अब घनघोर कलंक ।। 1 ।। 
 
प्रवचनकार हुए व्यापारी,
 कथा-आयोजन बने तमाशे। 
मंदिर श्रद्धाओं के विदोहक,
  धन के अर्जक सब अच्छे खासे ।। 
धर्मग्रंथ हो गये लुप्त सब, 
  डेरा / मठाधीशों ने नये शगूफे तराशे। 
आध्यात्मिक बहरूपियों ने ईजाद कर लिये। 
  कितने नये आध्यात्मिक झाँसे।।2।। 
 
बाबाओं की इस दुनिया में अब 
 सब ' गुरु ही गुरु ' है,
'गोविन्द ' का तो कहीं जिकर नहीं है। 
 छुप गये धर्म- संस्कृति अंधियारी गली में,
आध्यत्मिकता  कहीं सिसक रही है ।।
 बाबाओं / घोटालेबाजों / धंधेबाजों की तिकड़ियाँ ,
डेरों / मठों में छाई हर कहीं है। 
 मत आना प्रभु ! अवतार धर भूल कर भी,
 आपके लिये अब कोई जगह नहीं है ।।3।।
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

नया भारत, नई उड़ान: मोदी युग में आत्मविश्वास का नया शिखर

17 सितंबर जन्मदिन पर विशेष: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में 25 दिलचस्प बातें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

अगला लेख