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कोई हमदम ना रहा, कोई सहारा ना रहा

सोमवार,मई 8, 2017
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बीरेन नाग की फ़िल्म "कोहरा" का गीत है यह। बीरेन दा ने दो ही फ़िल्में बनाईं और दोनों ही सस्पेंस थ्रिलर। उनकी पहली फ़िल्म थी "बीस साल बाद", जो 1962 में आई थी और अपने ज़माने में बहुत बड़ी हिट थी। फिर उसके दो साल बाद उन्होंने उसी टीम - बिस्वजीत, वहीदा ...
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साल दो हज़ार पांच में आई फ़ि‍ल्‍म "यहां" का गीत है यह। निहायत "सेंसुअस", "तल्‍लीन", "राग-निमग्‍न" और उसके बावजूद एक क़ि‍स्‍म की बेचैनी, दुर्दैव की दुश्चिंताओं से भरा नग़मा। ख़लिश, कशिश और रोमैंटिक सरग़ोशियों में डूबा तराना।
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आनंद एल. राय ने यूं तो पांच फ़िल्में बनाई हैं, लेकिन पिछले आठ साल में उनके द्वारा बनाई गई तीन फ़िल्मों ("तनु वेड्स मनु", "रांझणा", "तनु वेड्स मनु रिटर्न्स") ने उन्हें अभी काम रहे शीर्ष निर्देशकों की पांत में लाकर खड़ा कर दिया। आनंद की फ़िल्मों में ...
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साल 1972 में, मीर के उसी क़लाम को उठाकर बीआर इशारा ने अपनी निहायत मेलोड्रमैटिक फ़िल्म "एक नज़र" के एक गीत में "सुपरइम्पोज़" कर दिया। अदब के हिमायती चाहें तो इसे "कुफ्र" कह सकते हैं और ये उनका हक़ है, लेकिन दूसरे दर्जे की उस फ़िल्म में कुछ नायाब ...
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मेरी जान तुम पे सदके

शनिवार,फ़रवरी 20, 2016
आशा की आवाज के रहस्य जिस माइक्रो अंदाज के पोरों से खोले हैं ओपी नैयर ने, और उन जादूभरे रहस्यों की सीढ़ियों से संगीत और संगीत की की गहराइयों और ऊंचाइयों से मुझे रूबरू कराया है, अन्य भी होंगे ही- मेरी जान तुझपे सदके, एहसान इतना कर दो मेरी जिंदगी ...
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सन् 53 में आई फिल्‍म 'शिकस्‍त' का गीत है यह। लता और तलत का दोगाना। परदे पर हैं दिलीप कुमार और नलिनी जयवंत। यह शांत रस का गीत है। तब भी यहां महान त्रासद नायक की छवि देखें, कैसी थिर है।
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सन् 1951 में आई फिल्‍म 'अनारकली' का गीत है यह। चितलकर के संगीत से सजी उस फिल्‍म ने तब ज़माना लूट लिया था और अनारकली की भूमिका निभाने वाली बीना राय तब पूरे मुल्‍क के दिलो-दिमाग़ पर छा गई थीं। विलायत तक उन्‍हीं का हल्‍ला। वैसा क़हर तो बाद में ...
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बिमल रॉय की फिल्‍म 'सुजाता' (1959) का मशहूर गीत है यह। संभवत: तलत का सर्वाधिक सुपरिचित, सर्वाधिक प्रतिनिधि गीत। तब तक तलत मुख्‍यत: दिलीप कुमार के लिए ही गाते थे, किंतु इस गीत की भाव-व्‍यंजना के लिए सचिन देव बर्मन को तलत से बेहतर कोई और नहीं सूझा।
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फिल्‍म 'जब वी मेट' का ख़ूब जाना-पहचाना गीत है यह। उस्‍ताद राशिद ख़ान की पकी हुई, परती आवाज़ में गुंथा हुआ। उस्‍ताद राशिद ख़ान हिंदुस्‍तानी क्‍लासिकी संगीत के रामपुर-सहसवान घराने से ताल्‍लुक़ रखते हैं, जिसमें गायकी में 'चैनदारी' का बड़ा ज़ोर है। ...
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दिल का दीया जलाके गया। यह लता का वैभव है। लता के विराट साम्राज्‍य का एक हिस्‍सा, लेकिन उनके तमाम गीतों में इस गीत का एक अलग ही मुक़ाम। कारण, जिस पिच पर उन्‍होंने इस गीत को गाया, वह अन्‍यत्र दुर्लभ है।
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सत्‍यजित राय की फिल्‍म 'चारुलता' (1964) का गीत है यह। गीतकार, रबींद्रनाथ ठाकुर (यह फिल्‍म भी रबींद्रनाथ के उपन्‍यास 'नष्‍ट नीड़' पर आधारित है), संगीतकार, स्‍वयं सत्‍यजित राय, और गायक, हमारे अपने किशोर कुमार।
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ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्‍म 'आनंद' (1971) का यह गीत है। फिल्‍म में कुल चार गाने थे। सभी एक से बढ़कर एक। लेकिन संगीतकार सलिल चौधरी ने फिल्‍म की अपनी सबसे पक्‍की धुन स्‍वरकोकिला के लिए बांधी। यह खमाज ठाट के राग मालगूंजी में निबद्ध रचना है, जिस पर जैसे ...
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वेलेंटाइन डे मौके पर रोमांटिक गानों का अपना ही मज़ा है। आप वेलेंटाइन डे को सेलेब्रेट करने में इन गानों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। रोमांटिक, सॉन्ग, वेलेंटाइन डे की खूबसूरती को और भी बढ़ा देते हैं। तो देखिए ये रोमांटिक सान्ग्स और डूब जाइए प्यार में।
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मीठी, मधुर और महकती-सी आवाज का जादूगर। जब गाते तो लगता कि एक मखमली अहसास कानों के रास्ते रूह के भीतर तक बहने लगा। गजलों के शहंशाह जगजीत सिंह तो अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन उनकी आवाज आज भी सुनने वालों को बेहद सुकून देती है।
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रफी यहाँ सिद्ध कर देते हैं कि गायन और उसकी बारीकियों को वे लिखाकर लाए थे। गुलूकारी के राज बताने की उन्हें जरूरत नहीं है। साफ-शुद्ध रिकॉर्डिंग के इस गीत में वे कानों के इतने करीब लगते हैं कि महसूस होता है वे जिंदा हैं और दो-तीन मकान छोड़कर इसी गली मे
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लागी बेरिया पिया के आवन की उन्हीं पर फबता है जिनके पिया नहीं आते या जिनकी किस्मत में पिया नहीं, उनके आने के गीत होते हैं। बेगम ने इस विरह गीत में प्रोषितपतिका या प्रतीक्षिणी के दर्द को ऐसा उड़ेला है कि औरत पीछे छूट जाती है। बस, उसका दर्द ही बचता है। ...
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यहाँ रफी का बेस, पथरीली संजीदगी और स्वर की स्थिरता गौर करने लायक है। ऐसा लगता है कि जैसे रात भर दिल में खामोश मातम करके प्रेमी की आँखें सूज गई हैं, गला भारी हो गया है और आवाज में गमगीनी की सर्दी उतर आई है। इमोशन को, मानी को कथा के वजन को और ...
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देखा जाए तो सी. अर्जुन मात्र इस एक गीत के कारण कालजयी माने जा सकते हैं, जिसका मुखड़ा हमने इस आलेख के शीर्षक के रूप में दिया है। ऐसा बहुत कम होता है कि किसी गीत में काव्यात्मक गुणवत्ता, धुन की मिठास और विलक्षणता, संगीत की उदात्त योजना और गायन की ...
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तू प्यार का सागर है...

बुधवार,सितम्बर 30, 2009
एक उम्दा फिल्म। खूबसूरत कथा। बलराज साहनी और नूतन का दिल को छू जाने वाला अभिनय। पवित्र और मूक प्यार का मर्मस्पर्शी आदर्श। एक से एक कर्णप्रिय गाने। दिलों को सदा गुदगुदाने वाला और कहीं-कहीं आँखों को भिगो जाने वाला संगीत और तिस पर आत्मा को धो जाने
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