'वैलनेस' के लिए कला अनिवार्य- चित्रकार सीरज सक्सेना

siraj saxena
पुनः संशोधित गुरुवार, 12 मार्च 2020 (15:50 IST)
(त्रिचूर के 'द नाटिका बीच रिसोर्ट' में सीरज की चित्रकला वर्कशॉप)
(शकील अख़्तर)

'कला जीवन को समृद्ध बनाती है। उसका परिष्कार करती है। कला जीवन के कल्याण या वैलनेस के लिए सिर्फ आवश्यक नहीं अनिवार्य है।'

यह बात और कवि सीरज सक्सेना ने कही। हाल ही में उन्हें त्रिचूर में 'द नाटिका बीच रिसोर्ट' द्वारा आयोजित एक चित्रकला वर्कशॉप में बतौर रेसीडेंट आर्टिस्ट आमंत्रित किया गया था। इस वर्कशॉप में 10 देशों से आए विदेशी अतिथि कलाकार शामिल हुए।

सीरज ने अपनी इस वर्कशॉप को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा, 'कला सिर्फ जीवन यापन के लिए नहीं बल्कि यह जीवन को उत्कृष्ट बनाने और उसके विस्तार के लिए ज़रूरी है। उन्होंने बताया, त्रिचूर के 'द नाटिका बीच' रिसोर्ट में इसी विचार बिंदू को ध्यान में रखते हुए
10 दिनों की यह वर्कशॉप आयोजित की गई।
समंदर के तट पर, नारियल के पेड़ों और फूलों के उद्यान में प्रकृति के बीच यह अनूठी कार्यशाला थी।

सीरज ने इस दौरान विदेशी अतिथियों के साथ पेपर कोलाज, कागज़ और कैनवास पर चित्रकला को लेकर काम किया गया। विदेशी अतिथियों के साथ मिलकर उनसे चित्रकला को लेकर अपने विचार और अनुभव साझा किए। उनकी जिज्ञासा के अनुरूप चित्रकला का बेहतर प्रशिक्षण दिया। 8 मार्च को यहां बकायदा वर्ल्ड वूमेन्स डे मनाया गया। इस मौके पर सीरज के समंदर की रेत पर बनाए स्कैच को वर्कशॉप में शामिल कलाकारों ने अलग-अलग रंगों के फूलों से सजाया।

सीरज कहते हैं, आमतौर पर चित्रकारों को कला अकादमियां, कला गैलरीज़, कला समीक्षक, बायर्स और आर्ट डीलर्स आमंत्रित करते
हैं। परंतु यह पहला मौका था जब किसी वैलनेस रिसोर्ट में चित्रकार को आमंत्रित किया गया था। यह बात भी अपने में सिद्ध करती है कि कला की मनुष्य और उसके जीवन के लिए कितनी ज़रूरी है।

'द नाटिका बीच रिसोर्ट' त्रिशूर केरल एक आयुर्वेदिक रिसोर्ट है। जहां प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धति के ज़रिये जीवन शैली को बेहतर बनाने की कोशिश की जाती है। इस पद्धति में शरीर के साथ ही मानसिक स्वास्थ पर ध्यान दिया जाता है। बेहतर दिनचर्या के साथ ही शाकाहारी भोजन को अपनाया जाता है। रिसोर्ट में भारत के साथ ही कई देशों के मेहमान इस पद्धति की सेवाएं लेने आते हैं। इनमें भी जर्मनी से सबसे अधिक अतिथि आते हैं। रिसोर्ट का अपना बीच है। यहां पर नारियल के भी बहुत वृक्ष हैं।
2009 में इस रिसोर्ट की स्थापना हुई है।



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