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Mahashivratri Essay : महाशिवरात्रि पर हिन्दी में निबंध

Updated: गुरुवार, 7 मार्च 2024 (12:05 IST)
प्रस्तावना : हिन्दुओं का एक बड़ा धार्मिक पर्व है महाशिवरात्र‍ि (Mahashivratri)। जिसे हिन्दू धर्म के प्रमुख देवता महादेव अर्थात् शिव जी के विवाह के रूप में मनाया जाता है। महाशिवरात्र‍ि का पर्व फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन शिवभक्त एवं शिव में श्रद्धा रखने वाले लोग व्रत-उपवास रखते हैं और विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना करते हैं।
 
महाशिवरात्रि नाम कैसे पड़ा : भगवान शिव का धरती पर अवतरण प्राय: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ करता है। अवतरण का यह महान दिन शिवभक्तों में 'महाशिवरात्रि' के नाम से जाना जाता है। शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव सभी जीव-जंतुओं के स्वामी एवं अधिनायक हैं। ये सभी जीव-जंतु, कीट-पतंग भगवान शिव की इच्छा से ही सब प्रकार के कार्य तथा व्यवहार किया करते हैं। 
 
शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव वर्ष में 6 मास कैलाश पर्वत पर रहकर तपस्या में लीन रहते हैं। उनके साथ ही सभी कीड़े-मकौड़े भी अपने बिलों में बंद हो जाते हैं। उसके बाद 6 मास तक कैलाश पर्वत से उतरकर धरती पर श्मशान घाट में निवास किया करते हैं। 
 
महाशिवरात्र‍ि की मान्यताएं : महाशिवरात्र‍ि को लेकर भगवान शिव से जुड़ीं कुछ मान्यताएं प्रचलित हैं। ऐसा माना जाता है कि इस विशेष दिन ही ब्रह्मा के रुद्र रूप में मध्यरात्र‍ि को भगवान शंकर का अवतरण हुआ था। वहीं यह भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने तांडव नृत्य कर अपना तीसरा नेत्र खोला था और ब्रह्माण्ड को इस नेत्र की ज्वाला से समाप्त किया था। 

इसके अलावा कई स्थानों पर इस दिन को भगवान शिव के विवाह से भी जोड़ा जाता है और यह माना जाता है कि इसी पावन दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था। 
 
महत्व : वैसे तो प्रत्येक माह में एक शिवरात्र‍ि होती है, परंतु फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को आने वाली इस शिवरात्र‍ि का अत्यंत महत्व है इसलिए इसे 'महाशिवरात्र‍ि' कहा जाता है। वास्तव में महाशिवरात्र‍ि भगवान भोलेनाथ की आराधना का ही पर्व है, जब धर्मप्रेमी लोग महादेव का विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

इस दिन शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है, जो शिव के दर्शन-पूजन कर खुद को सौभाग्यशाली मानती है। महाशिवरात्र‍ि के दिन शिवजी का विभिन्न पवित्र वस्तुओं से पूजन एवं अभिषेक किया जाता है और बिल्वपत्र, धतूरा, अबीर, गुलाल, बेर, उम्बी आदि अर्पित किया जाता है।

भगवान शिव को भांग बेहद प्रिय है अत: कई लोग उन्हें भांग भी चढ़ाते हैं। दिनभर उपवास रखकर पूजन करने के बाद शाम के समय फलाहार किया जाता है। इस दिन शिव मंत्रों तथा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने का विशेष महत्व है। 
 
उपसंहार : महाशिवरात्रि के दिन जो व्यक्ति दया भाव दिखाते हुए शिवजी की पूजा करते हैं, उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है। वैसे भी भोलेनाथ को जल्द ही प्रसन्न होने वाले देवता के रूप में भी माना जाता है, शिवरात्रि का पावन पर्व भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है तथा पूरे मन से उनका पूजन किया जाता है। 

Mahashivratri 2023
 

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