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उजाले की परछाई : दो गांधी आमने-सामने

बुधवार,जनवरी 27, 2021
उजाले की परछाई
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'द व्हाइट टाइगर फिल्म आ चुकी है। यह फिल्म लेखक अरविंद अडिगा की किताब पर आधारित है। अरविंद अडिगा एक पत्रकार के रूप में पहचाना जाने वाला नाम था फिर भारतीय साहित्यप्रेमियों के लिए इस नाम ने उम्मीद के विशाल द्वार खोल दिए। अरविंद अडिगा को वर्ष 2008 का ...
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यह किताब एक ओर अमेरिका और उसके राष्ट्रपति के सर्वशक्तिमान होने के मिथक को उघाड़ती है तो दूसरी ओर उन संकटों और दुविधाओं को भी उजागर करती है जिनसे ‘दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र’ आज जूझ रहा है।
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हतरीन लेखिका निधि जैन की 'रेवा में बहते मयूर पंख' सशक्त हस्ताक्षर है अद्धभुत प्रेम गाथा का। यह कहानी है कल-कल बहती रेवा की, जो साक्षी रही इतिहास के उन पन्नों की जिसमें सिमटा था कालजयी प्रेम,
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यह पुस्तक संस्कृत पढ़ाने के लिए नहीं है। यह कई संस्कृत शब्दों के अंग्रेज़ी में अपर्याप्त अनुवाद की व्याख्या करने की कार्य करती है, जिसका कि आम चलन है। यह पुस्तक ऐसे कई संस्कृत शब्दों को रेखांकित करती है जो शिथिल और बिना सोच-विचार के अंग्रेजी में ...
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पत्रकार और लेखक अनिता पाध्‍ये की लिखी इस किताब को बेहद ही खूबसूरत तरीके से मंजुल प्रकाशन ने दस्‍तावेज की शक्‍ल दी है। कलर फ़ोटोग्राफ्स, ग्लासी कागज और बहुत विस्तार से 10 हिंदी क्‍लासिक्‍स के बनने की कहानी दर्ज की गई है।
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समकालीन साहित्य के सृजन आकाश में इन दिनों एक नाम साहित्यिक दीप्ति-प्रदीप्ति और रचनात्मकता की पूरी गरिमा के साथ प्रभाषित हुआ है और वह नाम है -गरिमा मिश्र 'तोष'।
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किताब की शानदार कामयाबी को देखते हुए मंजुल प्रकाशन ने ‍हिंदी और मराठी भाषा में भी इसका प्रकाशन किया है। जबिक इसके गुजराती, तेलुगू और मलयालम संस्‍करण भी जल्‍दी ही आने वाले हैं।
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जब एक महामारी के कारण देश और दुनिया इतिहास की सबसे संकटपूर्ण स्थिति में फंसे हों और ऐसे समय समाज का कोई तबका अलग और उलट ढंग से पेश आए तो यह किसी भी सभ्य समाज और मजबूत सरकार के लिए नजरअंदाज करने वाली घटना नहीं है।
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मध्यप्रदेश के सुप्रसिद्ध राजनीतिक विश्लेषक एवं प्रखर पत्रकार कृष्ण मोहन झा द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के प्रथम कार्यकाल के दौरान लिखी गई थी। इस पुस्तक का शीर्षक था- यशस्वी मोदी।
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मध्‍यप्रदेश के इंदौर शहर की कुछ जिंदादिल महिलाओं की कहानी इन सबसे जुदा है। इन महिलाओं का लॉकडाउन कर्म सबसे ज्‍यादा सराहनीय रहा, सबसे ज्‍यादा काबि‍ल ए तारीफ है।
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स्थूल का सूक्ष्म में रूपांतरण प्रकृति का अवरोही नहीं आरोही नियम है। यही है वास्तविक उद्मगमिता जिस से चेतना का लघुत्तम संप्रेषण होता है। यह नियम जिस काल अथवा अंतराल में पूर्णता को प्राप्त होकर जिस किसी
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चेतना भाटी का कहानी संग्रह 'जब तक यहां रहना है' जिसमें 27 कहानियां हैं। चेतना जी, जिन्होंने व्यंग्य, लघुकथाएं, उपन्यास भी लिखे हैं उनमें विधा के अनुरूप शब्द विन्यास को ढालने की कला है।
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'लोक-लय' हिन्दी की लोकप्रिय लेखिका और कवयित्री तृप्ति मिश्रा का पुस्तक रूप में उन पारंपरिक लोक गीतों का मधुर संचयन है, जो हमारे लोक मानस की अमूल्य धरोहर हैं।
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किताब में एक ही वक्‍त में जिंदगी के कई एंगल्‍स नजर आते हैं।
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1981 के आसपास लिखी गई इस किताब में एक संक्रमण का जिक्र है और इसे वुहान 400 का ही नाम दिया गया है। यानी आज से करीब 40 साल पहले उस वायरस के बारे में लिए किताब में जिक्र कर दिया गया था। एक अमेरिकी की यह कृति शुरु तो एक ऐसी मां से होती है जो अपने बच्चे ...
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस के अवसर पर आज देश भर में अनेक समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में नई दिल्ली में केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता फग्गनसिंह कुलस्ते ने ‌'महानायक मोदी' शीर्षक से प्रकाशित एक ...
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जसराज के जन्मते ही पिता पं. मोतीराम ने उन्हें शहद चटाया था। उनके घर में इसे घुट्टी पिलाना कहा जाता है। मां कृष्णा बाई का कहना था कि सभी बच्चों में से मोतीरामजी ने केवल जसराज को ही शहद चटाया था।
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एक ऐसा ही नाम है रूमा देवी जो हम सब को प्रेरि‍त कर रहा है। हस्तकला, हस्तशिल्प, लोककला को प्रोत्साहन को लेकर यह नाम आज सुर्खि‍यों में है।
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पटकथा लेखन बहुत ही श्रम साध्य काम है। यह इतना कठिन काम है कि आपको रस से लबालब भरे एक प्याले को हाथों में थामे एक नट की तरह रस्सी पर चलना है और मजाल है रस की एक बूंद भी छलक जाए।
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