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पुस्तक समीक्षा : योग! जीरो बजट में हेल्थ इंश्योरेंस(व्यंग्य)

Written By WD
Updated: शुक्रवार, 1 जुलाई 2016 (14:57 IST)
एम.एम. चन्द्रा
योग का अर्थशास्त्र समझने वालों की इस दुनिया में बहुत कमी है। इसलिए हम आपको महत्त्वपूर्ण ज्ञान दे रहे हैं कि दुनिया में शून्य बजट में कोई भी स्वास्थ्य बीमा नहीं मिलता है, लेकिन योग शून्य बजट में स्वास्थ्य आश्वासन देता है। भारत जैसे विकसित देश के लिए बहुत उपयोगी है। सब तरीकों में योग सबसे कि‍फायती एवं सुगम है। इसलिए योग को हमारी जिंदगी का हिस्सा बनाना जरूरी है।



योग बाबा की सभी जड़ी बूटियां और प्रॉडक्ट तो बस सूंघने के लिए बने हैं। बाजार का इससे कोई लेना देना नहीं है। इस समय देश के हर कोने में योग के कार्यक्रम से लोग जुड़े हुए हैं, जिसके बहुत से फायदे हैं। सुबह-सुबह योग करो और गुरुओं के प्रॉडक्ट या किसी कंपनी का प्रॉडक्ट भी बेचो। यानि सब अपने-अपने समय की सुविधा के हिसाब से इस योग कार्यक्रम का लाभ उठा सकते हैं। सरकारी बीमा भी 1 रु का है लेकिन योग तो फ्री है। व्यापार से इसका कोई लेना देना नहीं, यह तो केवल समाज सेवा है।
 
UN द्वारा पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को भारत की उन आबादी के अनुरोध पर गत वर्ष जबरदस्ती लागू करवाया गया है जो 20 रुपए रोज पर गुजारा कर रहे हैं, जो 45 आबादी आधे पेट भोजन करती है, जो सर्दी गर्मी से हर साल हजारों कि तादाद में मर जाती है, उन महिलाओं के कारण जो 80 प्रतिशत एनीमिया से पीड़ित हैं, उन किसानों के आग्रह पर जो सिर्फ छोटी-सी पानी की समस्या के कारण आत्महत्या कर रहे, उत्पादन महंगा होने और सस्ता बिकने के खुशी खासी मर रहे है।
 
योग दिवस के लिए भी 21 जून इसलिए चुना गया, क्योंकि यह दुनिया के बड़े हिस्से में सबसे लंबा दिवस होता है। उपरोक्त सभी लोग पूरे दिन योग करके ज्यादा दिन के लिए सुरक्षित रह सकते हैं। योग दिवस जन-जन का जनांदोलन बनाया जा चुका है। अब अन्ना आंदोलन तो क्या? कोई भी अंतर्राष्ट्रीय आंदोलन योग दिवस की बराबरी नहीं कर सकता है।
 
सबसे बड़ी बात है कि योग को कुछ भी देना नहीं पड़ता यह देता ही देता है, वो भी सब कुछ फ्री में, अब योग ही सबका कल्याण कर सकता है भुखमरी से, गरीबी से, मंहगाई से भी, और बेरोजगारी से भी। देखा नहीं! योग बाबा ने गली-गली स्वरोजगार के तहत सबको रोजगार दे दिया है। अब यही एक मुक्ति का मार्ग बचा है जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बार बार अमेरिका जाकर ओबामा जी से मुहर लगवा दी है।
 
योग ही एक ऐसा आंदोलन है, जो सभी संप्रदाय को परलोक में तो नहीं इस इहलोक के लिए स्पेशल रूप से बनवाया गया है। तभी तो परलोक का पूरी तरह फायदा उठा पाएंगे, वरना अस्वस्थ परलोक जाओगे तो क्या घंटा मजा लोगे।
 
योग आस्तिक और नास्तिक के लिए जीरो बजट वाला हेल्थ इंश्योरेंस है। यह सरकार की गारंटी वाली योजना है। जैसे कि कला धन, बैंकों में 15 लाख और अच्छे दिन लाये गए हैं। यह भी कोई चुनावी जुमला नहीं एक हकीकत है। यह सिर्फ गरीब लोगों के लिए फायदेमंद है। अमीर लोग तो बस योग सिखाने में सबकी मदद करेंगे। उसके बदले में चाहे जल, जंगल और जमीन ही क्यों न उन्हें मुफ्त देनी पड़े।
 
गरीब देशों के लिए योग सबसे उपयोगी है। इससे काफी पैसा बचाया जा सकता है। विश्व में योग का कोई भी बड़ा कारोबार नहीं है। सिर्फ योग के बहाने दुनिया के हर देश में अरबों-खरबों का मामूली सा काम होता है। टीवी चैनल योग कारोबार सेवा को पूरा सहयोग कर रहे हैं। योग-बाबाओं का उदाहरण आज किसी से छुपाने की आवश्यकता ही नहीं है। योग सरल, सस्ता और सभी के लिए स्वास्थ्य उपलब्ध रहने का मार्ग है। योग करने से गरीब लोगों न भूख लगेगी न ही प्यास। योग करो और दाल में ज्यादा पानी मिला कर खाने से जो गरीब लोगों के पेट निकल आए हैं, वो गायब हो जाएंगे। इसीलिए योग ही गरीब देशों का एकमात्र मसीहा आंदोलन है।
 
गरीब लोगों की क्षमता बढ़ाने के लिए योग जरूरी है। इसीलिए भारत के लिए योग प्रतिष्ठा का विषय है। सरकार ने जनसामान्य की भलाई के लिए, योग को बढ़ावा देने हेतु विश्व स्तर पर सामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक चेतना को विकसित करने के लिए योग अब जरूरी हो गया है।
 
लेकिन जब तक योग बाबाओं को प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा, तब तक गरीबों का भला संभव नहीं।  इसलिए अब अंतर्राष्ट्रीय योग अवार्ड और राष्ट्रीय योग अवार्ड की घोषणा होगी, तो तैयार हो जाओ, हर दिन योग दिवस मनाओ, अगले साल इनाम पाओ। 
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