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गुरु पूर्णिमा पर कैसे करें महागुरु दत्तात्रेय भगवान की पूजा

WD Feature Desk
बुधवार, 9 जुलाई 2025 (12:08 IST)
How to celebrate Guru Purnima: इस वर्ष गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व 10 जुलाई 2025, दिन गुरुवार को मनाया जा रहा है। इस दिन गुरुओं के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। सभी गुरुओं के गुरु माने जाने वाले भगवान दत्तात्रेय की पूजा का इस दिन विशेष महत्व है, क्योंकि उन्हें त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु, महेश का सम्मिलित स्वरूप माना जाता है। उनकी पूजा करने से ज्ञान, शांति और समृद्धि तीनों की प्राप्ति होती है।ALSO READ: गुरु पूर्णिमा पर पढ़ें ये 5 शक्तिशाली मंत्र, मिलेंगे अनेक चमत्कारी लाभ
 
महागुरु दत्तात्रेय भगवान का महत्व: भगवान दत्तात्रेय महर्षि अत्रि और सती अनुसूया के पुत्र हैं। उनमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं की शक्ति और गुण समाहित हैं। उन्हें योग, तंत्र और ज्ञान का आदिगुरु माना जाता है। गुरु पूर्णिमा पर उनकी पूजा करने से पितृ दोष और गुरु दोष तथा अन्य दोष भी शांत हो जाते हैं और साधक को ज्ञान, बुद्धि व आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान दत्तात्रेय की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। यहां वेबदुनिया के प्रिय पाठकों के लिए पूजा की सरल विधि दी जा रही है। आइए जानते हैं...
 
गुरु पूर्णिमा पर महागुरु दत्तात्रेय भगवान की पूजा विधि: 
1. स्नान, पूजा और शुद्धिकरण: गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की सफाई: अपने पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। एक चौकी या पटिया पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाएं।
- मूर्ति/चित्र स्थापना: इस पर भगवान दत्तात्रेय की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। 
यदि मूर्ति न हो, तो आप भगवान विष्णु, शिव या ब्रह्मा जी की मूर्ति भी स्थापित कर सकते हैं, क्योंकि दत्तात्रेय इन तीनों का सम्मिलित स्वरूप हैं।
 
2. आवश्यक पूजा सामग्री:
- भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा/ चित्र
- अभिषेक के लिए गंगाजल
- सफेद या पीले फूल, जो विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।
- फूलों की माला
- चंदन
- कुमकुम/रोली
- अक्षत/चावल
- धूप, घी का दीपक
- नैवेद्य/भोग: बर्फी, कलाकंद या अन्य सफेद मिठाई, फल, दूध, खीर या सात्विक मिष्ठान।
- तुलसी दल
- पान का पत्ता, 
- सुपारी
- दक्षिणा
- जल के लिए कलश/लोटा।ALSO READ: गुरु पूर्णिमा: प्राचीन भारत के 14 महान गुरु जिन्होंने दिया धर्म और देश को बहुत कुछ
 
3. पूजा विधि:
- संकल्प: पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें।
- अभिषेक: भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं। यदि चित्र हो, तो उसे गंगाजल से छिड़काव करें।
- तिलक: भगवान को चंदन और कुमकुम का तिलक लगाएं।
- वस्त्र और फूल: यदि प्रतिमा हैं तो उन्हें स्वच्छ वस्त्र पहनाएं, फूल और माला अर्पित करें।
- धूप-दीप: शुद्ध घी का दीपक जलाएं और धूप करें।
- नैवेद्य अर्पित करें: भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं। तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं।
4. मंत्र जाप: भगवान दत्तात्रेय के मंत्रों का यथासंभव 108 बार या अधिक बार जाप करें।
- मूल मंत्र: 'ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः'
- दत्त गायत्री मंत्र: 'ॐ दिगंबराय विद्महे, योगीश्वराय धीमहि, तन्नो दत्तः प्रचोदयात्॥'
- महामंत्र: 'दिगंबरा-दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा' मंत्र जाप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना शुभ होता है।
 
5. स्तोत्र पाठ: यदि संभव हो तो श्री दत्तात्रेय स्तोत्र या अवधूत गीता का पाठ करें। यह पितृ दोष से मुक्ति के लिए भी सहायक माना जाता है।
- आरती: पूजा के अंत में भगवान दत्तात्रेय की आरती करें। साथ ही आप त्रिदेवों/ ब्रह्मा, विष्णु, महेश में से किसी की भी आरती गा सकते हैं, क्योंकि वे उन्हीं का स्वरूप हैं।
- प्रदक्षिणा: 3 या 7 बार आरती के बाद भगवान की परिक्रमा करें।
- पुष्पांजलि: अंत में हाथ में फूल लेकर भगवान को पुष्पांजलि अर्पित करें और उनसे अपनी मनोकामना पूर्ण करने और आशीर्वाद देने की प्रार्थना करें।
- प्रसाद वितरण: पूजा के बाद प्रसाद को भक्तों और परिवार के सदस्यों में वितरित करें।
 
इस विधि से भगवान महागुरु दत्तात्रेय की पूजा करने से आपको उनका आशीर्वाद प्राप्त होगा, जिससे आपके जीवन में ज्ञान, धन और शांति का संचार होगा।
 
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