गुजरात में धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, सरकार के सुनियोजित नियोजन से बदलेगा तीर्थस्थलों का स्वरूप
Gujarat News : गुजरात को वैश्विक स्तर पर पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार लगातार सक्रिय और प्रतिबद्ध नजर आ रही है। राज्य में स्थित सुप्रसिद्ध और स्थानीय आस्था के केंद्रों के रूप में पूजनीय तीर्थस्थलों का सुनियोजित विकास करने और वहां आने वाले लाखों भक्तों की सुख-सुविधाओं में वृद्धि करने के उद्देश्य से सरकार ने एक और बड़ा तथा जनहितैषी निर्णय लिया है। राज्य के गृह राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और यात्राधाम विकास मंत्री हर्ष संघवी द्वारा पवित्र तीर्थस्थलों के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स और नए कार्यों को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी गई है। सरकार के इस ठोस कदम से आने वाले दिनों में धार्मिक पर्यटन को बहुत गति मिलेगी।
दक्षिण गुजरात से लेकर सौराष्ट्र तक के 6 जिलों का समावेश
इस सैद्धांतिक मंजूरी के तहत गुजरात के भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण ६ प्रमुख जिलों के तीर्थस्थलों को शामिल किया गया है। इसमें दक्षिण गुजरात के वलसाड, सूरत और प्रकृति की गोद में बसे डांग जिले के पवित्र स्थानों को शामिल किया गया है।
इसके अलावा सौराष्ट्र के राजकोट और उसके आसपास के धार्मिक केंद्रों के साथ-साथ मध्य गुजरात के हेरिटेज सिटी अहमदाबाद और संस्कारी नगरी वडोदरा जिले में स्थित प्रख्यात तीर्थस्थलों को भी इस योजना से जोड़ा गया है। इन सभी निर्धारित जिलों में श्रद्धालुओं की संख्या और स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढांचे का व्यापक विकास किया जाएगा।
3.28 करोड़ रुपए के बजट से होगा तीर्थस्थलों का कायाकल्प
राज्य सरकार के पर्यटन और यात्राधाम विकास बोर्ड के समन्वय से इस पूरी योजना के लिए कुल 3.28 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। इस स्वीकृत राशि का उपयोग तीर्थस्थल परिसरों में पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था, पब्लिक यूटिलिटी, आधुनिक शौचालय, परिसर का सौंदर्यीकरण, एप्रोच रोड और भक्तों के लिए विश्राम गृह जैसी बुनियादी सुविधाएं तैयार करने के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही तीर्थस्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीसीटीवी कैमरे जैसी आधुनिक सुरक्षा प्रणाली भी विकसित की जाएगी।
निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के आदेश
संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ये सभी विकास कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर और पूरी गुणवत्ता के साथ पूरे होने अत्यंत अनिवार्य हैं। सरकार के इस योजनाबद्ध कदम के कारण आने वाले समय में तीर्थस्थलों का स्वरूप बदलेगा और वहां आने वाले दर्शनार्थियों की यात्रा अधिक सुखद और यादगार बनेगी। इन सुधारों और पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण स्थानीय स्तर पर व्यापार-रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
Edited By : Chetan Gour
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