ganesh chaturthi

ग़ालिब का ख़त-19

Written By WD
Updated: शनिवार, 26 जुलाई 2008 (16:14 IST)
मेरी जान,

Aziz AnsariWD
आख़िर लड़के हो, बात को न समझे। मैं तो और तफ्ता का अपने पास होना ग़नीमत न जानूँ। मैंने यह लिखा था कि बशर्त-ए-इक़ामत बुला लूँगा और फिर लिखता हूँ कि अगर मेरी इक़ामत यहाँ की ठहरी तो बे तुम्हारे न रहूँगा, न रहूँगा, ज़िनहार न रहूँगा।

मुंशी बालमुकुंद बेसबर का ख़त बुलंदशहर से दिल्ली और दिल्ली से रामपुर पहुँचा। तलफ़ नहीं हुआ। अगर मैं यहाँ रह गया, तो यहाँ से, और अगर दिल्ली चला गया, तो वहाँ से इस्लाह देकर उनके अशाअ़र भेज दूँगा।

  कल तक क़िस्सा नहीं चुका। मैं जल्दी नहीं करता, दो-एक महाजन बीच में हैं, हफ्ते-भर में झगड़ा फ़ैसल हो जाएगा, ख़ुदा करे, यह ख़त तुमको पहुँच जाए। जिस दिन बारात से फिरकर आओ, उसी दिन मुझको अपने वुरूद-ए-मसऊद की खबर देना।      
बेसबर को अब के बारह महीना-भर सबर चाहिए। वह लिफ़ाफ़ा बदस्तूर रखा हुआ है। अज़बसक़ि यहाँ के हज़रत मेहरबानी फ़रमाते हैं और हर वक्त आते हैं, फ़ुर्सत-ए-मुशाहिदा-ए-औराक़ नहीं मिली। तुम इसी रुक्के़ को उनके पास भेज ‍देना।

14 फरवरी 1860 ई. ग़ालिब

भाई, आज इस वक्त तुम्हारा ख़त पहुँचा। पढ़ते ही जवाब लिखता हूँ। ज़र-ए-सह साला-ए-मुजतम्मा हज़ारों कहाँ से हुए। सात सौ पचास रुपया साल पाता हूँ। तीन बरस के दो हज़ार दो सौ पचास रुपए। सौ रुपए मुझे मदद-खर्च मिले थे वे कट गए, डेढ़ सौ मुतफ़र्रिक़ात में गए, रहे दो हज़ार रुपए। मीर मुख्तार कार एक बनिया है और मैं उसका कर्जदार क़दीम हूँ।

अब जो वह दो हज़ार लाया, उसने अपने पास रख लिए और मुझसे कहा कि मेरा हिसाब कीजिए। सात कम पंद्रह सौ उसके सूद-मूल के हुए। क़र्ज़ मुतफ़र्रिक़ात ग्यारह सौ चुका दे, नौ सौ बाक़ी रहे, आधे तू ले, आधे मुझको दे, परसों चौथी को वह रुपया लाया है।

कल तक क़िस्सा नहीं चुका। मैं जल्दी नहीं करता, दो-एक महाजन बीच में हैं, हफ्ते-भर में झगड़ा फ़ैसल हो जाएगा, ख़ुदा करे, यह ख़त तुमको पहुँच जाए। जिस दिन बारात से फिरकर आओ, उसी दिन मुझको अपने वुरूद-ए-मसऊद की खबर देना।

मई 1860 ग़ालिब
Show comments

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

80s retro look trend : 80 के दशक के रेट्रो लुक से स्मृति और नॉस्टेल्जिया तक

हिंदी दिवस 2026: हिंदी नहीं रही अब पहले जैसी, फिर भी दुनिया में बढ़ता जा रहा इसका दबदबा

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक कृष्ण मोहन झा की किताब "डा मोहन भागवत संदेश" का विमोचन