ganesh chaturthi

ग़ालिब का ख़त-14

Written By WD
Published: शनिवार, 26 जुलाई 2008 (14:25 IST)
रखियो ग़ालिब मुझे इस तल्ख़ नवाई में मुआ़फ़
आज कुछ दर्द मेरे दिल में सिवा होता है

बंदा परवर,
पहले तुमको यह लिखा जाता है किमेरे दोस्त क़दीम मीर मुकर्रम हुसैन साहिब की ख़िदमत में मेरा सलाम कहना और यह कहना कि अब तक जीता हूँ और इससे ज्यादा मेरा हाल मुझको भी मालूम नहीं। मिर्जा हातिम अली साहिब मेहर की जानिब में मेरा सलाम कहनो...

Aziz AnsariWD
तुम्हारे पहले ख़त का जवाब भेज चुका था, कि उसके दो दिन या तीन दिन के बाद दूसरा ख़त पहुँचा। सुनो साहिब, जिस शख्स को जिस शग्ल का ज़ौक़ हो और वह इसमें बेतकल्लुफ़ उम्र बसर करे, इसका नाम ऐश है। और भाई, यह जो तुम्हारी सुखन-गुस्तरी है, इसकी शोहरत में मेरीभी तो नामवरी है। मेरा हाल इस फ़न में अब यह है कि शेर कहने की रविश और अगले कहे हुए अशआ़र सब भूल गया।

  एक अज़ीज़ का मातम कितना सख्त होता है! जो इतने अज़ीज़ों का मातमदार हो, उसको ज़ीस्त क्योंकर न दुश्वार हो। हाय, इतने यार मरे कि जो अब मैं मरूँगा तो मेरा कोई रोने वाला भी न होगा।      
सब हाँ, अपने हिंदी कलाम में से डेढ़ शेर, यानी एक मुक्ता और एक मिसरा याद रह गया है। सो गाह-गाह जब, दिल उलटने लगता है, तब दस-पाँच बार यह मक्ता़ ज़बान पर आ जाता है।

ज़िंदगी अपनी जब इस शक्ल से गुज़री 'ग़ालिब'
हम भी क्या याद करेंगे कि खुदा रखते थ े

फिर जब सख्त घबराता हूँ और तंग आता हूँ तो यह मिसरा पढ़कर चुप हो जाता हूँ-

ऐ मर्ग-ए-नागहां! तुझे क्या इंतजार है?

यह कोई न समझे कि मैं अपनी बेरौनक़ी और तबाही के ग़म में मरता हूँ। जो दुख मुझको है उसका बयान तो मालूम, मगर उस बयान की तरफ़ इशारा करता हूँ। अँग्रेज़ की क़ौम से जो इन रूसियाह कालों के हाथ से क़त्ल हुए, उसमें कोई मेरा उम्मीदगाह था और कोई मेरा शफ़ीक़ और कोई मेरा दोस्त और कोई मेरा यार और कोई मेरा शागिर्द, कुछ माशूक़, सो वे सबके सब खाक़ में मिल गए।

एक अज़ीज़ का मातम कितना सख्त होता है! जो इतने अज़ीज़ों का मातमदार हो, उसको ज़ीस्त क्योंकर न दुश्वार हो। हाय, इतने यार मरे कि जो अब मैं मरूँगा तो मेरा कोई रोने वाला भी न होगा।
Show comments

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

ब्रिक्स से भारत क्या हासिल कर सकता है...?

सत्य, प्रेम, करुणा से लेकर राम हरि और जयजगत तक विनोबा भावे का सर्वोदय दर्शन!

ईरान-अमेरिका युद्ध का नया दौर, फिर बढ़ीं तेल की कीमतें

रोजाना अपनाएं ये 10 जादुई आदतें, बीमारियों से रहेंगे कोसों दूर और चेहरे पर आएगा गजब का ग्लो

डॉ अंजना चक्रपाणि मिश्र की दो नवीन कृतियों 'मन अनहद नाद' और 'अनकहे से संवाद' का भव्य विमोचन