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क्रिसमस पर्व की रोचक बातें, क्या तुम जानते हो?

Updated: शुक्रवार, 24 दिसंबर 2021 (16:39 IST)
प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को प्रभु यीशु मसीह (Christmas) के जन्मदिन के रूप में संपूर्ण विश्व में ईसाई समुदाय के लोग विभिन्न स्थानों पर अपनी-अपनी परंपराओं एवं रीति-रिवाजों (Christian Festival and Culture) के साथ श्रद्धा, भक्ति एवं निष्ठा के साथ मनाते हैं। क्रिसमस ईसाइयों का पवित्र पर्व है जिसे वह बड़ा दिन भी कहते हैं। चर्चों में क्रिसमस डे के उपलक्ष्य में बिजली की लड़ियों से परिसरों को सजाया गया है। क्रिसमस के मौके पर क्रिसमस वृक्ष का विशेष महत्व है। 

यहां जानिए खास बातें-  
 
- सदाबहार क्रिसमस वृक्ष डगलस, बालसम या फर का पौधा होता है जिस पर क्रिसमस के दिन बहुत सजावट की जाती है। अनुमानतः इस प्रथा की शुरुआत प्राचीन काल में मिस्रवासियों, चीनियों या हिबू्र लोगों ने की थी।
 
 
- यूरोप वासी भी सदाबहार पेड़ों से घरों को सजाते थे। ये लोग इस सदाबहार पेड़ की मालाओं, पुष्पहारों को जीवन की निरंतरता का प्रतीक मानते थे। उनका विश्वास था कि इन पौधों को घरों में सजाने से बुरी आत्माएं दूर रहती हैं।

 
- आधुनिक क्रिसमस ट्री Christmas tree की शुरुआत पश्चिम जर्मनी में हुई। मध्यकाल में एक लोकप्रिय नाटक के मंचन के दौरान ईडन गार्डन को दिखाने के लिए फर के पौधों का प्रयोग किया गया जिस पर सेब लटकाए गए। इस पेड़ को स्वर्ग वृक्ष का प्रतीक दिखाया गया था।
 
- उसके बाद जर्मनी के लोगों ने 24 दिसंबर को फर के पेड़ से अपने घर की सजावट करनी शुरू कर दी। इस पर रंगीन पत्रियों, कागजों और लकड़ी के तिकोने तख्ते सजाए जाते थे। 
 
- विक्टोरिया काल में इन पेड़ों पर मोमबत्तियों, टॉफियों और बढ़िया किस्म के केकों को रिबन और कागज की पट्टियों से पेड़ पर बांधा जाता था।
 
- इंग्लैंड में प्रिंस अलबर्ट ने 1841 ई. में विडसर कैसल में पहला क्रिसमड ट्री लगाया था।
 
- क्रिसमस की रात सांताक्लॉज (Santa Claus) द्वारा बच्चों के लिए उपहार लाने की मान्यता है। ऐसी मान्यता है कि सांताक्लॉज रेंडियर पर चढ़कर किसी बर्फीले जगह से आते हैं और चिमनियों के रास्ते घरों में प्रवेश करके सभी अच्छे बच्चों के लिए उनके सिरहाने उपहार छोड़ जाते हैं।

 
- सांताक्लॉज Santa Claus की प्रथा संत निकोलस ने चौथी या पांचवीं सदी में शुरू की। वे एशिया माइनर के बिशप थे। उन्हें बच्चों और नाविकों से बेहद प्यार था। उनका उद्देश्य था कि क्रिसमस और नववर्ष के दिन गरीब-अमीर सभी प्रसन्न रहें। उनकी सद्भावना और दयालुता के किस्से लंबे अरसे तक कथा-कहानियों के रूप में चलते रहे।
 
- एक कथा के अनुसार उन्होंने कोंस्टेटाइन प्रथम के स्वप्न में आकर तीन सैनिक अधिकारियों को मृत्यु दंड से बचाया था। सत्रहवीं सदी तक इस दयालु का नाम संत निकोलस के स्थान पर सांताक्लॉज हो गया। यह नया नाम डेनमार्क वासियों की देन है।

Merry Christmas

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