Hanuman Chalisa

क्या आप जानते हैं प्राचीन काल में कंक्रीट कैसे बनता था

- अथर्व पंवार
 


प्राचीन काल में भवन निर्माण की तकनीक आज के मुकाबले अधिक प्रभावशाली थी। आज प्राचीन भवनों की मजबूती और उसकी दिवारों पर हुए प्लास्टर को देख कर हम अचंभित हो जाते हैं कि यह इतने वर्षों से एक जैसे कैसे रह सकते हैं जबकि आज के युग के भवनों में जल्दी ही प्लास्टर उखड़ने और दिवारों में दरार आने की समस्या आ जाती है।
 
आज कंक्रीट बनाने के लिए मशीनों का उपयोग करते हैं। पर प्राचीनकाल में इसकी तकनीक अलग थी। एक लम्बे स्तम्भ को लिटा दिया जाता था। उसके एक छोर पर एक पत्थर का पहिया लगा दिया जाता था और दूसरा छोर में छेद करके किसी कीलनुमा वस्तु से जोड़ दिया था जिससे वह एक स्थान पर स्थित तो रहे साथ में दूसरा छोर गोलाकार में घूम भी सके। उस पहिए के परिधि मार्ग को खोद कर एक नाली बना दी जाती थी। फिर इस पहिए को बैल या घोड़े के द्वारा खिंचा जाता था। जिससे वह निरंतर चक्कर लगा सके। उस नाली में कंक्रीट बनाने का मिश्रण डाल दिया जाता था और एक चक्की की भांति उस पहिए के दबाव से यह मिश्रण पीस जाता था और आपस में मिल जाता था।
 
इस मिश्रण को लगातार 4-5 घंटे दिन में और शाम में 2-3 घंटे उस पहिए के दबाव से मिलाया और पीसा जाता था। इसके बाद उसे निकलकर एक गड्ढे या बड़े पात्र में भर दिया जाता था और उस पर पानी छिड़क कर गिला रखा जाता था ताकि वह सुखकर ठोस ना हो पाए।
 
प्राचीन काल में बने इस कंक्रीट में रेत,चुना,बेल का फल,गुड़,प्राकृतिक गोंद,हरड़ा,कच्चे केले,दालें और मिलाने के लिए पानी का उपयोग किया जाता था। इन सभी को एक उचित अनुपात में ही मिलाया जाता था। सबकी अलग-अलग मात्रा थी।
 
आज भी दक्षिण भारत में यह प्रक्रिया देखने को मिलती है। मध्यप्रदेश में हिंगलाजगढ़ के किले में भी यह पूरा सेटअप आज भी देखने को मिलता है।

चित्र सौजन्य - अथर्व पंवार
चित्र - हिंगलाजगढ़ किले में स्थित कंक्रीट बनाने का यन्त्र

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

सभी देखें

Essay on Friendship Day: फ्रेंडशिप डे: दोस्ती के अटूट बंधन का खूबसूरत पर्व, पढ़ें हिन्दी में रोचक निबंध

ये हमारी कहानी नहीं हैं, हमारी कहानी कुछ और है, जिसे हमें खोजना है

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता (फिर इंदौर) हमारा

Banyan Tree Benefits: शीघ्रपतन और वीर्य के पतलेपन से हैं परेशान? आयुर्वेद में छिपा है बरगद के फल और दूध का यह पारंपरिक नुस्खा

अगला लेख