Hanuman Chalisa

सरल है भगवान श्री गणेश को प्रसन्न करना, 4 तरह की सामग्री से बनी गणेश मूर्ति देती हैं मनचाहे धन का वरदान

भगवान श्री गणेश धन का विशेष आशीर्वाद देते हैं। श्री गणेश स्थापना के 10 दिन में कभी भी इन 4 तरह के श्री गणेश पूजने से धन का आगमन सरल होता है। चार प्रकार की सामग्री से बने श्री गणेश धन के लिए विशेष रूप से शुभ माने गए हैं। पारद, श्वेतार्क, नीम की लकड़ी और गुड़... 
 
कहा जाता है कि पारद से निर्मित भगवान श्रीगणेश की पूजा करने से वह सबकुछ मिल जाता है जो आप चाहते हैं। जहां भी पारद गणेश का पूजन होता है वहां हमेशा सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। विशेष तौर पर धन की कभी कोई कमी नहीं आती।
 
* पारद गणेश की स्थापना से आने वाले संकटों से छुटकारा मिलता है।
 
* पारद गणेश की स्थापना से रिद्धि-सिद्धि यानी धन व बुद्धि दोनों की प्राप्ति होती है।
 
* पारद गणपति को अपनी दुकान या गोदाम में स्थापित करने से धन में हमेशा वृद्धि होती रहती है।
 
* पारद गणपति की रोज पूजा करने से दरिद्रता दूर होती है।
 
* विद्यार्थी यदि नित्य पारद गणपति की पूजा करें तो उन्हें सफलता मिलनी तय है।
 
* श्वेतार्क मूर्ति को गल्ले या तिजोरी में रखने से बेशुमार धन बढ़ता है।
 
* अथाह धन संपत्ति का स्वामी बनना चाहते हैं तो नीम की लकड़ी से बने गणेशजी की आराधना करें।
 
* गुड़ की प्रतिमा से आश्चर्यजनक रूप से धन की वृद्धि होती है।

Show comments

सभी देखें

गुप्त नवरात्रि में ये मंत्र जप लिया तो तुरंत ही दूर होंगे संकट और माता का मिलेगा आशीर्वाद

गुंडिचा मंदिर क्यों है जगन्नाथ रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव? जानिए 5 खास बातें

भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन हैं? जानिए रथयात्रा से जुड़ी यह रोचक परंपरा

गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक की सही व्याख्या क्या है? मौलाना जरजिस अंसारी के दावे की पड़ताल

पुरी के जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा का इतिहास: कब, कैसे और क्यों हुई शुरुआत?

सभी देखें

21 July Birthday: आपको 21 जुलाई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 21 जुलाई 2026: मंगलवार का पंचांग और शुभ समय

27 जुलाई से शनि होंगे वक्री: 11 दिसंबर तक इन 5 राशियों पर बढ़ सकती हैं मुश्किलें, जानें आपकी राशि शामिल है या नहीं

Ashadhi Ekadashi Date 2026: आषाढ़ी एकादशी पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

देवशयनी एकादशी 2026: कब है शुभ मुहूर्त? जानें चातुर्मास की शुरुआत और भगवान विष्णु को शयन कराने की सही विधि

अगला लेख