ganesh chaturthi

श्री गणेश पर रचना : नमामि त्वम् विनायकम्

Updated: गुरुवार, 8 सितम्बर 2016 (11:38 IST)
भू-गणेश भुव: गणेश, गणेश तत्सवितुर हैं,
अथ गणेश इति गणेश, गणेश कालचक्रधुर हैं।
सत् गणेश चित गणेश, गणेश ही आनंद हैं,
शत् गणेश शून्य गणेश, गणेश ही अनंत हैं।
 
शुभ गणेश श्री गणेश, गणेश ब्रह्मनाद हैं,
जप गणेश पूजा गणेश, गणेश ही प्रसाद हैं। 
 
कर्म गणेश पूण्य गणेश, गणेश ही प्रारब्ध हैं,
ईश गणेश ईष्ट गणेश, गणेश ही आराध्य हैं।
 
मित्र गणेश बंधु गणेश, गणेश से संबंध हैं,
कण गणेश अणु गणेश, गणेश रंद्र रंद्र हैं।
 
मनु गणेश प्रभु गणेश, गणेश ही सर्वेश हैं,
मैं गणेश तुम गणेश, गणेश ही गणेश हैं।


लेखक के बारे में
राजीव रत्न पाराशर
लेखक भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में सेवाएं दे चुके हैं। इन दिनों कैलिफोर्निया में संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार के लिए सलाहकार के रूप में काम कर रहे हैं।.... और पढ़ें
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