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गणेशजी के 8 रूपों में से ये रूप है सबसे मंगलकारी, गणेश उत्सव में करें इनकी पूजा

Updated: शुक्रवार, 10 सितम्बर 2021 (10:57 IST)
भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी को 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत होती है, जो अतंत चतुर्दशी तक चलती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार 10 सितंबर 2021 शुक्रवार से यह पर्व प्रारंभ हो रहा है और 19 सितंबर अनंत चतुर्दशी तक चलेगा। इस दौरान गणपति जी के खासकर अष्ट रूपों की पूजा होती है। आओ जानते हैं उनका कौनसा रूप सबसे मंगलकारी माना गया है।
 
 
अष्ट विनायक : वैसे तो गणेशजी के कई अवतार हुए हैं परंतु आठ अवतार ज्यादा प्रसिद्ध हैं जिन्हें अष्ट विनायक कहते हैं। 1. महोत्कट विनायक, 2. मयूरेश्वर विनायक, 3. गजानन विनायक, 4. गजमुख विनायक, 5. मयुरेश्वर विनायक, 6. सिद्धि विनायक, 7. बल्लालेशवर विनायक और 8. वरद विनायक। इसके अलावा चिंतामन गणपति, गिरजात्म गणपति, विघ्नेश्वर गणपति, महा गणपति आदि कई रूप हैं।
 
सिद्धि विनायक : उक्त रूपों में सिद्धि विनायक को सबसे मंगलकारी माना गया है। सिद्धटेक नामक पर्वत पर इनका प्राकट्य होने के कारण इनको सिद्धि विनायक कहा जाता है। मात्र सिद्धि विनायक की उपासना से हर संकट और बाधा से तुरंत ही मुक्ति मिल जाती है।
 
कहते हैं कि सृष्टि निर्माण के पूर्व सिद्धटेक पर्वत पर भगवान विष्णु ने इनकी उपासना की थी। इनकी उपासना के बाद ही ब्रह्माजी सृष्टि की रचना बिना विघ्न के कर पाए। यही विघ्‍न हरता भी हैं। 
 
सिद्धि विनायक का स्वरुप चतुर्भुजी है और इनके साथ इनकी पत्नियां रिद्धि सिद्धि भी विराजमान हैं। सिद्धि विनायक के ऊपर के हाथों में कमल एवं अंकुश और नीचे के एक हाथ में मोतियों की माला और एक हाथ में मोदक से भरा पात्र है। 
 
सिद्धि विनायक की पूजा से हर तरह के विघ्न समाप्त होते हैं और हर तरह के कर्ज से मुक्ति मिलती है। इसनी आराधना से घर परिवार में सुख, समृद्धि और शांति स्थापित होती है और संतान की प्राप्ती होती है। 
 
सिद्धि विनायक के मंत्र : 
"ॐ सिद्धिविनायक नमो नमः"  
"ॐ नमो सिद्धिविनायक सर्वकार्यकत्रयी सर्वविघ्नप्रशामण्य सर्वराज्यवश्याकारण्य सर्वज्ञानसर्व स्त्रीपुरुषाकारषण्य"

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