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ढोलकल गणेश : इतनी ऊंचाई पर कैसे स्थापित की होगी ये गणपति की मूर्ति

Updated: शुक्रवार, 17 सितम्बर 2021 (15:10 IST)
फोटो सोर्स : दंतेवाड़ा टूरिज्म
 
छत्तीसगढ़ में ढोलकल गणेश का मंदिर प्रसिद्ध है लेकिन यहां जाना बहुत ही मुश्किल है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको बैलाडीला के जंगलों में ट्रैकिंग करना पड़ेगी और ऊंची पहाड़ी पर चढ़ना भी होगा। यदि आप रोमांच और ट्रैकिंग को पसंद करते हैं तो यह आपके लिए बहुत अच्छा स्थान है।
 
ढोलकल गणेश का स्थान जिला दंतेवाड़ा से करीब 13 किलोमीटर दूर फरसपाल गांव के पास बैलाडिला पहाड़ी में पर स्थित है। लगभग 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है यहां पर गणेशजी की एक विशालकाय और प्राचीन मूर्ति रखी हुई है। यह रहस्य अभी तक बरकरार है कि यह मूर्ति यहीं पर बनाई थी या कि उसे नीचे से लाकर ऊपर रखा गया और यहां जगलों के बीच इतनी ऊंची पहाड़ी पर क्यों रखा गया?
 
पुरातत्व विभाग के अनुसार यह मूर्ति लगभग 1000 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है और माना जाता है कि इस मूर्ति को 9वीं और 11वीं शताब्दी के बीच नागवंशी शासकों के शासनकाल के दौरान बनाई गई थी। यह जगह प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग है, और उन लोगों के लिए जो हरे पहाड़ियों के बीच ट्रेक करना पसंद करते हैं।
 
जनश्रुति है कि यहां पर परशुराम और गणपतिजी में युद्ध हुआ था। इस युद्ध में गणेश जी का एक दांत टूट गया था और जिसके कारण वे एकदंत कहलाए थे। परशुराम के फरसे से गजानन का दांत टूटा, इसलिए पहाड़ी के नीचे जो गांव है उसका नाम फरसपाल है। यह भी कहा जाता है कि यहां कि गणपति की प्रतिमा ढोलक के आकार की तरह दिखती है, इसीलिए इस पहाड़ी का नाम ढोलकल पड़ा। इसे ढोलकट्टा भी कहते हैं।
 
यहां के गणेशजी की प्रतिमा चारभुजाधारी है। गणेशजी की उदर पर नाग का अंकन है और जनेऊ धारी मूर्ति के पास फरसा भी है। एक हाथ में लड्डू भी है। इसकी स्थापना छिंदक नागवंशी राजाओं ने की थी। प्रतिमा ललितासन मुद्रा में है। उल्लेखनीय है कि कुछ वर्षों पूर्व यह मूर्ति चोरी हो गई है।

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