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Written By WD Feature Desk
Last Updated : गुरुवार, 4 सितम्बर 2025 (16:25 IST)

Ganesh chaturthi 2025: इस मुस्लिम देश के रक्षक हैं श्रीगणेश, 700 सालों से ज्वालामुखी की आग से कर रहे लोगों की हिफाजत

ganesh chaturthi 2025
Lord ganesha temple in indonesia: स्था की शक्ति सरहदों, धर्मों और भाषाओं की सीमाओं से परे होती है। इसका एक जीवंत और अद्भुत उदाहरण इंडोनेशिया के माउंट ब्रोमो में देखने को मिलता है। दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले इस देश में, एक सक्रिय ज्वालामुखी के मुहाने पर पिछले 700 सालों से भगवान गणेश की एक प्राचीन प्रतिमा विराजमान है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह मूर्ति न केवल उनकी धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह ज्वालामुखी से निकलने वाले विनाशकारी लावे को भी नियंत्रित करती है, जिससे आसपास रहने वाले लोग सुरक्षित रहते हैं।

खौलते लावा के बीच आस्था का केंद्र
पूर्वी जावा में स्थित माउंट ब्रोमो इंडोनेशिया का एक बेहद सक्रिय ज्वालामुखी है। यहां के स्थानीय लोगों, खासकर तेंगरेसे समुदाय के लिए, यह पर्वत सिर्फ एक भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि एक पवित्र स्थान है। इस ज्वालामुखी के मुहाने पर, एक चट्टान पर भगवान गणेश की यह सदियों पुरानी प्रतिमा स्थापित है। इसे 'अनादि गणेश' कहा जाता है।

यह मूर्ति वहां कब और कैसे स्थापित हुई, इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं है, लेकिन माना जाता है कि इसे यहां 14वीं शताब्दी में, जब इंडोनेशिया में हिंदू धर्म का प्रभाव था, स्थापित किया गया था। यह मूर्ति इस बात का प्रमाण है कि भले ही समय के साथ धर्म बदल गए हों, लेकिन लोगों की आस्था और विश्वास नहीं बदला है।

विनाश से बचाने वाले विघ्नहर्ता
सदियों से, माउंट ब्रोमो समय-समय पर फूटता रहता है, जिससे निकलने वाला लावा और राख आस-पास के गांवों के लिए खतरा बन जाता है। स्थानीय लोक मान्यताओं के अनुसार, जब भी ज्वालामुखी के फटने का खतरा होता है, तो लोग गणेश जी की इस प्रतिमा के सामने प्रार्थना करते हैं। उनका मानना है कि गणपति बप्पा, जो विघ्नहर्ता के नाम से जाने जाते हैं, उनकी प्रार्थना स्वीकार करते हैं और ज्वालामुखी के प्रकोप को शांत करते हैं।
यह विश्वास इतना गहरा है कि हर साल यहां 'यज्ञ कसदा' नामक एक अनूठा उत्सव मनाया जाता है। इस उत्सव के दौरान, भक्तगण ज्वालामुखी के मुहाने पर चढ़ते हैं और भगवान गणेश को फल, सब्ज़ियां, फूल और चावल जैसे प्रसाद अर्पित करते हैं, जिन्हें वे सीधे ज्वालामुखी के मुहाने में डाल देते हैं। यह अनुष्ठान इस विश्वास का प्रतीक है कि इन प्रसाद के बदले गणेश जी उनकी रक्षा करेंगे।

सांस्कृतिक सद्भाव का प्रतीक
यह प्रतिमा सिर्फ हिंदू धर्म के लोगों के लिए पूजनीय नहीं है। इंडोनेशिया में रहने वाले मुस्लिम और अन्य धर्मों के लोग भी इस प्रतिमा का सम्मान करते हैं। वे इसे एक पवित्र स्थल और अपनी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा मानते हैं। यह उदाहरण दिखाता है कि कैसे धार्मिक आस्थाएं आपस में मिल सकती हैं और लोगों को बांटती नहीं, बल्कि जोड़ती हैं। यह गणेश जी की मूर्ति वैश्विक भाईचारे और शांति का संदेश देती है।


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