dharma sangrah

फादर्स डे पर पढ़ें दोहे : पर बेटी के रूप में, सदा गई मैं हार.....

Updated: रविवार, 20 जून 2021 (19:10 IST)
विवाहित बेटी का पछतावा
इंदु पाराशर
 
खुद को हारा सोचती, 
पाती हूँ लाचार ।
उठा न पाऊँ फोन मैं, 
हों पापा बीमार।।
 
बहन , बहू , पत्नी बनी,
माँ बन सींचा प्यार। 
पर बेटी के रूप में ,
सदा गई मैं हार।।
 
आँसू छलके पलक से, 
हुए लाल जब गाल। 
सीने से भींचा मुझे, 
और सहलाया भाल ।।
 
उस दिल की, कुछ विवशता,
कुछ , अँसुवन का भार। 
जा न सकी , मैं बाँटने ,
पछताती हर बार।
 
रहूँ दौड़ती, मैं यहाँ, 
सुनकर , हर आदेश ।
सौ नखरे , करती वहाँ,
था वह,  मेरा देश।
 
सारे कारज, छोड़कर, 
आन बैठते , पास, 
काम करूँगा बाद में, 
बिटिया सबसे खास ।।
 
उनके , चौथे फोन पर ,
हँस कहती हूँ, आज ।
उलझ गई थी, मैं जरा, 
मुझको, हैं सौ काज ।।
 
बचपन वाले , वस्त्र हों,
रंग उड़ी , तस्वीर ।
सीने से , उसको लगा ,
कहते हैं , जागीर ।।
 
मेरा मन तो, बँट गया ,
टुकड़े-टुकड़े, आज ।
किंतु तुम्हारे, ह्रदय पर,
केवल मेरा,  राज ।
 
कल आऊँगी , मैं वहाँ, 
सुनकर , इतनी बात। 
दौड़ पड़े,  बाजार को, 
लेकर, थैली हाथ ।
 
अम्मा, पूरी तल रही ,
और बनाती खीर। 
आज, लाड़ली आएगी, 
नयन, खुशी का नीर। 
 
वे होते, बीमार जब, 
मुश्किल में, बेज़ार ।
पहुँच न पाती, वक्त पर, 
मैं जाती हूँ हार ।।
 
नम, गीली आँखें लिए,
व्याकुल, विव्हल प्रीत।
करते हैं, मुझको विदा ,
बेटी, जग की रीत।। 
 
हृदय तोड़ता, सरहदें ,
करता है, चीत्कार ।
मैं, बिटिया के रूप में ,
हर पल जाती, हार।
(C) इंदु पाराशर

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली..!

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है...

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

अगला लेख