Kisan Andolan : जंतर-मंतर पर 'किसान संसद' का पहला दिन खत्म, शुक्रवार को फिर जुटेंगे किसान

पुनः संशोधित गुरुवार, 22 जुलाई 2021 (21:15 IST)
मुख्य बिंदु
किसानों 'संसद' से फिर दिखाई ताकत
स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का हुआ चुनाव
किसानों ने कहा- लेकर रहेंगे अधिकार
नई दिल्ली। भारी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ करते हुए 200 किसानों के एक समूह ने मध्य दिल्ली के जंतर मंतर पर गुरुवार को 'किसान संसद' शुरू की। जंतर मंतर, संसद भवन से कुछ ही दूरी पर स्थित है जहां मानसून सत्र चल रहा है। राष्ट्रगान के बाद गुरुवार शाम 5 बजे खत्म हो हुई। शुक्रवार की सुबह 11 बजे फिर 200 किसान आएंगे। किसान बस में बैठकर वापस सिंघु बॉर्डर के लिए रवाना हो गए।

किसानों ने कहा कि किसान संसद आयोजित करने का उद्देश्य यह प्रदर्शित करना है कि उनका आंदोलन अब भी जारी है तथा केंद्र को यह संदेश देना है कि वे भी जानते हैं कि संसद कैसे चलाई जाती है। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और हजारों कर्मियों को इलाके में तैनात किया गया है।

किसान नेता रमिंदर सिंह पटियाला ने कहा कि (किसान) संसद के तीन सत्र होंगे। 6 सदस्यों का चयन किया गया है जिन्हें तीनों सत्र के लिए अध्यक्ष (स्पीकर) और उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) चुना जाएगा। प्रथम सत्र में किसान नेता हन्नान मुल्ला और मंजीत सिंह को इन पदों के लिए चुना गया।

अन्य नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि गणतंत्र दिवस की घटना के बाद इस बार किसानों ने कम संख्या में एकत्र होने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि न तो हम और न ही सरकार भारी भीड़ के प्रति सहज है। उन्होंने किसान संसद की जरूरत के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि मीडिया देश भर में कोविड की स्थिति पर रिपोर्टिंग कर रहा है और यह संदेश जा रहा है कि अंतिम सांसें गिन रहा है। कक्का ने कहा कि किसान संसद के जरिए हमने दिखा दिया है कि आंदोलन अब भी जीवंत है और हम अपना अधिकार लेकर रहेंगे।
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) नेता राकेश टिकैत ने कहा कि आठ महीने बाद सरकार ने स्वीकार किया कि दिल्ली की सीमाओं पर बैठे लोग किसान हैं। उन्होंने कहा कि किसान जानते हैं कि संसद कैसे चलानी है। जो लोग संसद में बैठे हैं-चाहे वे विपक्षी नेता हों या सरकार के लोग हों, यदि वे हमारे मुद्दे नहीं उठाते हैं तो हम उनके निर्वाचन क्षेत्र में अपनी आवाज उठाएंगे।

उन्होंने कहा ‍कि यह दुनिया की पहली संसद है जो अवरोधकों के अंदर चल रही है और जिसे किसानों ने शुरू किया है। किसान संसद, संसद का सत्र जारी रहने तक चलेगी और आप (सरकार) को हमारी मांगें माननी पड़ेगी। टिकैत ने कहा कि वे तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए एक प्रस्ताव पारित करेंगे। किसान नेता हन्नान मुल्ला ने कहा कि तीन नये कृषि कानूनों को लेकर संसद में हंगामा हुआ।
उन्होंने कहा कि किसान संसद में हम उन तीन कृषि कानूनों पर चर्चा करेंगे जिनके खिलाफ हम लड़ रहे हैं। ये काले कानून संसद में चर्चा के बगैर पारित किये गये थे। हम किसान संसद के जरिए इन्हें खारिज करेंगे। मुल्ला ने कहा कि किसानों ने सभी सांसदों को पत्र लिख कर अपनी मांग उठाई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि संसद उनके मुद्दों पर चर्चा नहीं कर रही है। दिल्ली के उप राज्यपाल (एलजी) अनिल बैजल ने जंतर मंतर पर नौ अगस्त तक अधिकतम 200 किसानों को प्रदर्शन करने की विशेष अनुमति दी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि करीब 5,000 सुरक्षाकर्मी नई दिल्ली जिले में तैनात किए गए हैं। पुलिस उपायुक्त(नयी दिल्ली) दीपक यादव ने कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) की कई कंपनियां जंतर मंतर पर तैनात की गई हैं। इलाके में सीसीटीवे कैमरे भी लगाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि जंतर मंतर के दोनों ओर अवरोधक लगाए गए हैं और पानी की बौछार करने वाली दो मशीनें भी वहां रखी गई हैं। जहां किसान संसद चल रही है, उस इलाके में शुरूआत में मीडियाकर्मियों को जाने की इजाजत नहीं दी गई थी। हालांकि, बाद में परिचय पत्र की जांच करने के बाद उन्हें अंदर जाने की अनुमति दे दी गई। इससे पहले, 200 किसानों का समूह पुलिस सुरक्षा के बीच बसों में सिंघू सीमा प्रदर्शन स्थल से जंतर मंतर पर पूर्वाह्न 11 बजे से शाम पांच बजे तक प्रदर्शन करने पहुंचा।
प्रदर्शनकारी किसान संघों का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा से इस बारे में शपथपत्र देने को कहा गया था कि वे कोविड के सभी नियमों का अनुपालन करेंगे और शांतपिपूर्ण आंदोलन करेंगे। गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनकारी किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद यह पहला मौका है जब अधिकारियों ने किसान संघों को शहर के अंदर प्रदर्शन करने की अनुमति दी है। प्रदर्शनकारी किसान संघों की सरकार के साथ 10 से अधिक दौर की वार्ता गतिरोध को दूर कर पाने में नाकाम रही है।
दिल्ली से लगे टिकरी बॉर्डर, सिंघू बॉर्डर तथा गाजीपुर बॉर्डर पर किसान पिछले साल नवम्बर से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दी जाए। हालांकि सरकार का कहना है कि ये कानून किसान हितैषी हैं। सरकार और प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच कई दौर की वार्ता बेनतीजा रही है।

पत्रकारों में झड़प : एक स्वतंत्र पत्रकार द्वारा कथित तौर पर हमला किए जाने के बाद एक प्रमुख हिंदी समाचार चैनल का कैमरामैन घायल हो गया, जहां किसान नये कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह जानकारी पुलिस ने दी। पुलिस ने कहा कि कैमरामैन की पहचान नागेंद्र गोसाईं के रूप में हुई है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गोसाईं पर हमला स्वतंत्र पत्रकार प्रभजोत सिंह द्वारा किया गया। अधिकारी ने बताया कि सिंह को हिरासत में ले लिया गया है।

उन्होंने बताया कि गोसाईं ने कहा कि सिंह सुबह मीडियाकर्मियों को अपशब्द कह रहे थे और उसकी रिकॉर्डिंग भी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सिंह ने एक महिला पत्रकार के खिलाफ भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा कि जब अन्य पत्रकारों ने अपत्ति जतायी तो कहासुनी हुई और सिंह ने उन पर एक ट्राईपोड से हमला किया। उन्होंने बताया कि गोसाई ने कहा कि उन पर सिंह ने तीन बार हमला किया जिसमें उनके हाथ में चोट लगी। गोसाईं ने कहा कि एक मेडिकोलीगल केस (एमएलसी) किया गया है और संसद मार्ग पुलिस थाने में एक लिखित शिकायत दी गई है।



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