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2 करोड़ की कार से रईसजादे ने ली 2 होनहार इंजीनियरों की जान, निबंध लिख मिली जमानत, लोग बोले ये कैसा न्याय?

Updated: मंगलवार, 21 मई 2024 (16:56 IST)
porsche hit and run case in pune: महाराष्ट्र के पुणे में एक नाबालिग रईसजादे ने अपनी पोर्शे कार की अंधाधुंध रफ्तार बाइक सवार दो इंजीनियरों को कुचलकर मार दिया। दोनों की दर्दनाक मौत हो गई। लेकिन इस पूरे मामले में ट्विस्‍ट तब आया, जब हादसे के करीब 14 घंटे बाद ही पुणे के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग को हादसे पर निबंध लिखने की सजा सुनाते हुए जमानत दे दी। हालांकि आरोपी के बिल्‍डर पिता को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

निबंध लिखवाकर जमानत : हादसे के बाद पुणे पुलिस ने नाबालिग के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद उसे हिरासत में ले लेकर जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया था। लेकिन वहां से निबंध लिखवाकर उसे जमानत दे दी गई। लेकिन पुलिस का आरोप है कि बिल्डर का बेटा 17 साल का नाबालिग खुद स्वीकार कर चुका है कि वह शराब पीने का आदी है। हादसे के दौरान वह बिना रजिस्ट्रेशन की कार को 160 की स्पीड से दौड़ा रहा था। ऐसे में पुलिस उसके खिलाफ सख्त सजा की मांग लेकर अब सेशन कोर्ट में पहुंच गई है।

यूएस जाने वाला था अनीश : अनीश के एक दोस्‍त ने बताया कि अनीश पढ़ने में बेहद होशियार था। उसने कॉलेज में बहुत अच्‍छा परफॉर्म किया था। उसने बताया कि वो पढ़ाई और जॉब के सिलसिले में यूएस जाने वाला था, वो कोडिंग के बारे में बातें करता था। न सिर्फ उसका फ्यूचर बहुत ब्राइट था बल्‍कि वो बहुत विनम्र और सहज था। लेकिन इस हादसे ने उसकी जान ले ली। अनीश के दोस्‍तों ने बताया कि बहुत दिनों से सभी दोस्‍त मिले नहीं थे, इसलिए वे एक साथ एक रेस्‍टोरेंट में मिलकर डिनकर करने वाले थे। लेकिन ये अनहोनी हो गई।

जबलपुर की थी अश्‍विनी : बता दें कि हादसे में इस रईसजादे की हरकत अपनी जान गंवाने वाली एक इंजीनियर मध्‍यप्रदेश के जबलपुर की निवासी थी जो पुणे में नौकरी कर रही थी। जिसका नाम अश्‍विनी कोष्‍ठा था। जबकि उसके साथ अपनी जान गवांने वाले शख्‍स का नाम अनीश अवधिया है। हैरान करने वाली बात है कि इतनी लापरवाही से कार चलाकर पुणे के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग को हादसे पर निबंध लिखने की सजा सुनाते हुए जमानत दे दी।

कौन है रईसजादा जिसने ली जान: दरअसल, पुलिस के मुताबिक 17 साल का नाबालिग पुणे के बड़े बिल्डर का बेटा है। वह शराब पीकर तेज रफ्तार में कार दौड़ा रहा था। तभी उसने बाइक को टक्कर मार दी। जिससे बाइक सवार दो इंजीनियरों की मौत हो गई। हादसे में जबलपुर के शक्ति नगर सैनिक सोसायटी निवासी अश्विनी कोष्टा (26) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक सवार दोस्त अनीश अवधिया ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था।

बोर्ड ने बालिग मानने से किया था इनकार : अब कार से कुचलने वाले इस नाबालिग को 10 साल की सजा हो सकती है, क्‍योंकि पुलिस ने आरोपी को बालिग मानने और सख्त सजा का अनुरोध किया है। हालांकि पुलिस ने बोर्ड के सामने भी अपील की थी कि 17 साल के नाबालिग आरोपी को बालिग की तरह ट्रीट किया जाए और सख्त से सख्त सजा दी जाए। लेकिन बोर्ड ने उसे बालिग मानने से इनकार कर दिया था।

फड़नवीस ने कहा- एडल्ट की तरह ट्रीट हो आरोपी : इस मामले में अब महाराष्‍ट्र सरकार ने हस्‍त्‍क्षेप किया है। मामले में भले ही जुवेनाइल कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी हो, लेकिन पुणे की पुलिस नाबालिग को बालिग की तरह ट्रीट किए जाने को लेकर सोमवार को सेशन कोर्ट में अर्जी दे चुकी है। निचली अदालत से लगाई यही अर्जी जुवेनाइल कोर्ट ने खारिज कर दी थी, लेकिन अब पुलिस ने मामले में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़नवीस से चर्चा की। जिसके बाद महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़नवीस ने मामले को एडल्ट की तरह ट्रीट करने के निर्देश दिए हैं।

बेटी का आज अंतिम संस्कार : हादसे में एमपी के जबलपुर की बेटी के अश्‍विनी के पिता सुरेश कुमार कोष्टा मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी कार्यालय में पदस्थ थे। जबकि अश्‍विनी पुणे में एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थीं। परिजन शव लेकर सोमवार शाम जबलपुर पहुंचे हैं। मंगलवार को अंतिम संस्कार ग्वारीघाट में किया जाएगा।

किन शर्तों पर जुवेनाइल बोर्ड ने दी जमानत क्या है नया हिट-एंड-रन कानून : भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अनुसार, जो ब्रिटिश-कालीन भारतीय दंड संहिता का रिप्लेस्मेंट है। जिसके तहत अगर किसी ड्राइवर के लापरवाही से गाड़ी चलाने के चलते कोई गंभीर सड़क दुर्घटना होती है और वह पुलिस या किसी अधिकारी इस घटना की जानकारी दिए बिना चला जाता है, तो उसे दंडित किया जा सकता है। जिसके लिए 10 साल तक की जेल और 7 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

पहले हिट एंड रन कानून क्या था : भारतीय न्याय दंड सहिंता में पहले हिट-एंड-रन जैसी घटनाओं के लिए कोई सीधा कानून नहीं था। हालांकि इसके बजाय, ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए IPC की धारा 304 ए का प्रयोग किया जाता था। जिसके मुताबिक लापरवाही से किए गए किसी काम की वजह से अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो अधिकतम दो साल की जेल या जुर्माना हो सकता है।
Edited by Navin Rangiyal
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