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13 अक्टूबर : कमला एकादशी का महत्व, कथा, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, पारण का शुभ समय

सोमवार,अक्टूबर 12, 2020
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काम्पिल्य नगरी में सुमेधा नामक एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ निवास करता था। ब्राह्मण बहुत धर्मात्मा था और उसकी पत्नी पतिव्रता स्त्री थी। यह परिवार बहुत सेवाभावी था।
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एकादशी तिथि को श्रीहरि विष्णु का पूजन किया जाता है। आओ जानते हैं एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा में कौन सी 11 चीजें चढ़ाने से वे प्रसन्न होंगे।
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आज एकादशी है। ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे। यह आरती करने से श्रीहरि विष्णु प्रसन्न होकर खुशहाल जीवन का आशीर्वाद देते हैं। यहां पढ़ें आरती...
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प्रतिमाह शुक्ल और कृष्ण पक्ष के ग्यारहवें दिन एकादशी तिथि मनाई जाती है। एकादशी व्रत-उपवास का महत्व तीनों लोक में प्रसिद्ध है। अगर आप किसी भी तरह के श्राप, पितृ दोष से ग्रसित है, तो उससे मुक्ति पाने के लिए यह दिन बहुत खास है।
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अधिक मास भगवान श्रीविष्णु का प्रिय मास होने के कारण इस महीने में श्रीहरि विष्णु जी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। ऐसा कहा जाता हैं कि अधिक मास व्रत करने वाला तथा खास तौर पर एकादशी का व्रत करने से जीवन के हर प्रकार के दु:खों से छूट जाता है
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धर्मराज बोले- हे जनार्दन! अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या नाम है? तथा उसकी कथा क्या है? कृपा करके आप मुझे बताइए।
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अधिक/ पुरुषोत्तम मास में आने वाली एकादशी का नाम पद्मिनी है। अनेक पुण्यों को देने वाली यह एकादशी इस वर्ष रविवार, 27 सितंबर 2020 को मनाई जाएगी।
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पद्मिनी एकादशी की 15 खास बा‍तें

शुक्रवार,सितम्बर 25, 2020
रविवार, 27 सितंबर को पद्मिनी एकादशी है। पौराणिग ग्रंथों में एकादशी व्रत-उपवास करने का बहुत महत्व होता है। हिन्दू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के
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इस वर्ष 27 सितंबर 2020, रविवार को पद्मिनी एकादशी व्रत रखा जाएगा। इस एकादशी का व्रत अधिक मास में रखा जाता है। पुरुषोत्तम में यह एकादशी आने के कारण इसे पुरुषोत्तमी एकादशी भी कहते हैं।
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18 सितंबर 2020 से प्रारंभ हुए अधिक मास 18 अक्टूबर को समाप्त होगा, जबकि 3 सितंबर से प्रारंभ हुआ अश्विन माह 31 अक्टूबर को समाप्त होगा। अश्विन माह के अंतर्गत अधिकमास में दो एकादशियां आती हैं, जबकि अश्विन माह बड़ा होने के कारण इसमें 4 एकादशियां शामिल ...
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पौराणिक मान्यता के अनुसार पितरों की आत्मा की शांति के लिए एवं उनके उद्धार के लिए श्राद्ध पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी बहुत अधिक महत्व माना गया है और इसी उद्देश्य के लिए यह व्रत रखा जाता है। वर्ष 2020 में यह एकादशी 13 सितंबर 2020, रविवार को मनाई ...
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आश्विन मास के श्राद्ध पक्ष में आने वाली एकादशी के दिन व्रत करने से पितृ दोष दूर होता है तथा पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। यह तिथि 'इंदिरा एकादशी' के नाम से जनमानस में प्रसिद्ध है।
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इस वर्ष अधिकमास होने से 24 की जगह 26 एकादशियां होगी। माह में 2 एकादशियां होती हैं अर्थात आपको माह में बस 2 बार और वर्ष के 365 दिनों में मात्र 24 बार ही नियमपूर्वक एकादशी व्रत रखना है। हालांकि प्रत्येक तीसरे वर्ष अधिकमास होने से 2 एकादशियां जुड़कर ये ...
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कृष्णा जन्माष्टमी के बाद आने वाली एकादशी को डोल ग्यारस कहते हैं। श्रीकृष्ण जन्म के अठारहवें दिन माता यशोदा ने उनका जल पूजन (घाट पूजन) किया था। इसी दिन को 'डोल ग्यारस' के रूप में मनाया जाता है।
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डोल ग्यारस महत्व- इसका महत्व श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा था। एकादशी व्रत सबसे महान व्रत में आता है। इसके प्रभाव से सभी दुखों का नाश होता है, समस्त पापों का नाश करने वाली इस ग्यारस को परिवर्तनी ग्यारस कहा जाता है।
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29 अगस्त 2020 को परिवर्तिनी एकादशी व्रत यानी डोल ग्यारस है। भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का पूजा की दृष्टि से विशेष महत्व है।
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भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की ग्यारस को परिवर्तिनी एकादशी एवं डोल ग्यारस आदि नामों से भी जाना जाता है। इस साल यह शुभ दिन 29 अगस्त 2020 को आ रहा है...
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29 अगस्त 2020, शनिवार को परिवर्तिनी एकादशी व्रत मनाया जा रहा है। इस व्रत से वाजपेय यज्ञ के समान फल मिलता है। आगे पढ़ें...
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वर्ष 2020 में भाद्रपद मास की अजा/जया एकादशी शनिवार, 15 अगस्त 2020 को मनाई जा रही है। शास्त्रों में एकादशी व्रत का काफी महत्‍व है। भाद्रपद मास में आने वाली इस एकादशी का व्रत रखने से भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का भी
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