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कामदा एकादशी व्रत कब रखा जाएगा, जानें मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Written By WD Feature Desk
Updated: बुधवार, 2 अप्रैल 2025 (11:23 IST)
2025 Kamada Ekadashi : कामदा एकादशी व्रत हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। 2025 में, कामदा एकादशी 8 अप्रैल, मंगलवार को मनाई जाएगी। कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के मंदिर में जाएं तथा श्री विष्णु के मंत्रों का जाप करें। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें। साथ ही विष्णु पुराण का पाठ करें।ALSO READ: Weekly Rashifal 2025: किन राशियों के लिए शुभ रहेंगे ये 7 दिन, पढ़ें 12 राशियों का साप्ताहिक राशिफल
 
आइए जानते हैं यहां एकादशी पूजन के मुहूर्त और पारण समय : 
 
कामदा एकादशी मंगलवार, 08 अप्रैल 2025 के मुहूर्त : Kamada Ekadashi Shubh Muhurat 2025 
 
चैत्र शुक्ल एकादशी तिथि का प्रारम्भ- 07 अप्रैल 2025, दिन सोमवार को रात 08:00 बजे से,
एकादशी तिथि की समाप्ति- 08 अप्रैल 2025, दिन मंगलवार को रात 09 बजकर 12 मिनट पर।
 
कामदा एकादशी पारण समय 2025 : Kamada Ekadashi Paran Timing
 
पारण/ व्रत तोड़ने का समय- 09 अप्रैल को सुबह 06 बजकर 02 मिनट से 08 बजकर 34 मिनट तक।
पारण तिथि पर द्वादशी समापन का समय- दोपहर 10 बजकर 55 मिनट पर।
 
Kamada Ekadashi Importance कामदा एकादशी का महत्व: कामदा एकादशी का व्रत रखने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह व्रत पारिवारिक जीवन की समस्याओं को दूर करने और सुख-समृद्धि लाने में मदद करता है।

माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन तामसिक भोजन तथा किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहें तथा इनका सेवन न करें।। किसी भी जीव को नुकसान न पहुंचाएं। धार्मिक मान्यतानुसार कामदा एकादशी व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का एक उत्तम अवसर है। तथा यह जीवन को सुखमय बनाने हेतु भी फलदायी व्रत माना गया है। साथ ही जन्म-जन्मांतर के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।ALSO READ: साल 2025 में कब-कब पड़ेगी एकादशी तिथि, जानें पूरे साल की लिस्ट
 
कामदा एकादशी पूजा विधि और पारण की तैयारी: Kamada Ekadashi Puja Vidhi
- चैत्र शुक्ल एकादशी के दिन, सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को एक चौकी पर स्थापित करें।
- भगवान विष्णु को फूल, फल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
- कामदा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।
- पूजा के समय विष्णु चालीसा का पाठ का जप करें।
- दिन भर उपवास रखें और शाम को भगवान विष्णु की आरती करने के बाद फलाहार करें।
- अगले दिन, द्वादशी तिथि को, ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें।
- इसके बाद, स्वयं भोजन ग्रहण करके व्रत का पारण करें।
 
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