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क्या है करतारपुर कॉरिडोर

Updated: मंगलवार, 12 नवंबर 2019 (14:04 IST)
करतारपुर कॉरिडोर का सुझाव सबसे पहले पंजाब के दिग्गज नेता कुलदीप सिंह वडाला ने दिया था। उन्होंने इसके लिए कई वर्षों भारत और पाकिस्तान की अथॉरिटी से आग्रह किया। इसके लिए उन्होंने डेरा बाबा नानक और करतारपुर में 18 वर्षों तक अरदास की थी। इस पर भारत-पाक के बीच पहली वार्ता 1998 में हुई थी। इसके बाद वर्तमान सरकार ने इस पर कार्य किया।
 
भारत के तीर्थयात्री पाकिस्तान में पहले करतारपुर साहिब फिर ननकाना साहिब जाते हैं। सिखों के पहले गुरु गुरुनानक देवजी अपनी 4 प्रसिद्ध यात्राओं को पूरा करने के बाद 1522 में करतारपुर साहिब में रहने लगे थे। नानकजी ने अपने जीवनकाल के अंतिम 17 वर्ष, 5 माह और 9 दिन यहीं बिताए थे, जबकि उनका जन्म 1469 में वर्तमान पाकिस्तान के तलवंडी (अब ननकाना साहिब) में हुआ था। 
 
पंजाब के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक भारत ने कॉरिडोर बनाया उसके आगे करतारपुर तक पाकिस्तान ने कॉरिडोर बनाया है।
 
डेरा बाबा नानक वही स्थान है जहां गुरुनानक देवजी ने अपनी पहली उदासी (यात्रा) के बाद 1506 में ध्यान लगाया था। जिस जगह पर बैठकर गुरु नानक देवजी ने ध्यान लगाया था, उस जगह पर 1800 ईस्वी के आसपास महाराजा रणजीत सिंह ने गुरुद्वारा बनवाया। 
 
करतारपुर साहिब, पाकिस्तान के नारोवाल जिले में रावी नदी के तट पर स्थित है। यह जगह भारतीय सीमा से महज 3 किलोमीटर दूर स्थित है। भारतीय क्षेत्र डेरा बाबा से लेकर अंतरराष्ट्रीय सीमा तक का दायरा महज 3.5 किलोमीटर है। मतलब लगभग 6.5 किलोमीटर का है यह कॉरिडोर। 
 
इस कॉरिडोर को बनाने में भारत सरकार ने 1.74 करोड़ रुपए खर्च किए हैं जबकि पंजाब सरकार ने डेरा बाबा नानक स्थान पर 159 करोड़ खर्च किए हैं। दूसरी ओर भारत सरकार ने श्रद्धालुओं के टर्मिनल पर 500 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें
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