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कितना असरकारी होगा जनता परिवार?

Updated: बुधवार, 15 अप्रैल 2015 (18:57 IST)
भारतीय राजनीति में 'जनता परिवार' के उदय का कुछ खास असर होता दिखाई नहीं दे रहा है, बल्कि अभी से यह सवाल जरूर उठने शुरू हो गए हैं कि यह 'परिवार' आखिर कितने दिन तक एकजुट रह पाएगा।

इन पार्टियों का अमूमन अपने ही राज्य में असर है, अत: ऐसा नहीं लगता कि ये एक दूसरे को फायदा पहुंचा सकते हैं। हालांकि फिलहाल यह तय हो गया है कि जनता परिवार मुलायमसिंह के नेतृत्व में काम करेगा। 
 
क्या है राज्यों में स्थिति : उत्तर प्रदेश में इस समय समाजवादी पार्टी की सरकार है और वहां उसके 232 (कुल 403) विधायक हैं, जबकि बिहार में सत्तारूढ़ जदयू के पास 110 (कुल 243) विधायक हैं, जिसे राजद के 24 विधायकों का बाहर से समर्थन प्राप्त है। कर्नाटक में प्रभाव रखने वाली एचडी देवेगौड़ा की पार्टी जदएस के पास 225 सदस्यीय विधानसभा में मात्र 40 सीटें हैं, यही हाल हरियाणा में चौटाला की इनेलोद का है, जहां 90 सदस्यीय विधानसभा में उसके पास महज 19 सीटें हैं। 
 
संसद में क्या है स्थिति : यदि संसद की बात करें तो लोकसभा में यह दल सरकार के लिए कोई मुसीबत पैदा नहीं कर सकते, क्योंकि भाजपा के साथ बहुमत का पूरा आंकड़ा है साथ ही सहयोगी दलों का समर्थन भी उसे प्राप्त है। लोकसभा में सपा के 5, राजद 4, जदयू 2, जेडीएस 2 और आईएनएलडी के दो सांसद हैं। 
 
...और राज्यसभा में : हां, राज्यसभा में जरूर ये दल सरकार के लिए मुश्किल का सबब बन सकते हैं क्योंकि उच्च सदन में सत्तारूढ़ दल की स्थिति अच्छी नहीं है। यहां सपा के पास सर्वाधिक 15 सांसद हैं, जबकि जदयू के पास 12 सांसद हैं, जबकि जदयू, जेडीएस और आईएनएलडी का एक-एक सांसद है।
  
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