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क्रिप्टो बाजार में भारी गिरावट, क्या भारत में बैन हो जाएगी Cryptocurrency...

Updated: बुधवार, 24 नवंबर 2021 (08:06 IST)
नई दिल्ली। मोदी सरकार संसद के शीतकालिन स‍त्र में क्रिप्टोकरेंसी पर बिल लाने की तैयारी कर रही है। देश में क्रिप्टोकरेंसी के बैन होने की खबरों से क्रिप्टो बाजार में हड़कंप मच गया। बिटकॉइन, इथेरियम, टीथर समेत तमाम क्रिप्टोकरेंसियों में भारी गिरावट देखी गई।
 
देखते ही देखते सभी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी लगभग 15 प्रतिशत या उससे अधिक गिर गई। बिटकॉइन में 17% से अधिक, एथेरियम में लगभग 15 प्रतिशत और टीथर में लगभग 18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। 
 
भारत में अभी क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग के संबंध में न तो कोई प्रतिबंध है और न ही कोई नियमन की व्यवस्था है। इस पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी महीने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की थी और संकेत दिया था कि इस मुद्दे से निपटने के लिए सख्त विनियमन संबंधी कदम उठाए जाएंगे।
 
उन्होंने सिडनी डायलॉग में भी चेतावनी देते हुए सभी देशों से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि क्रिप्टोकरेंसी गलत हाथों में ना पड़ जाए। RBI और Sebi जैसी वित्तिय नियामक संस्थाएं भी पहले ही क्रिप्टोकरेंसी पर चिंता जता चुकी है।
 
इस विधेयक में भारतीय रिजर्ब बैंक द्वारा जारी आधिकारिक डिजिटल मुद्रा के सृजन के लिए एक सहायक ढांचा सृजित करने की बात कही गई है। इस प्रस्तावित विधेयक में भारत में सभी तरह के निजी क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करने की बात कही गई है। हालांकि, इसमें कुछ अपवाद है, ताकि क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित प्रौद्योगिकी एवं इसके उपयोग को प्रोत्साहित किया जा सके।

सामान्य करेंसी से कैसे अलग है क्रिप्टोकरेंसी : क्रिप्टोकरेंसी फ्लैट करेंसी पर सरकार का नियंत्रण या नियमन नहीं होता। ये डिसेंट्रलाइज्ड होती हैं। अधिकतर देशों ने इसे कानूनी वैधता नहीं दी है। क्रिप्टो के साथ ऐसा भी है कि इनकी एक फिक्स्ड सप्लाई होती है, ऐसे में मुद्रास्फीति से कीमतें गिरने का डर नहीं रहता है। हालांकि इसे भी करेंसी की तरह ही वस्तु या सेवा को खरीदने के लिए लेने-देन में इस्तेमाल किया जाता है।
 
कैसे तय होते हैं दाम : क्रिप्टोकरेंसी बाजार की अस्थिरता निवेशकों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। यहां तेजी से होने वाले उतार चढ़ाव झटके में किसी को निहाल कर सकते हैं। कई लोगों को क्रिप्टोकरेंसी के दामों में आई गिरावट ने तबाह कर दिया। जैसे ही किसी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल बढ़ता है, उसकी मांग बढ़ती है और इस तरह से उस कॉइन की वैल्यू भी बढ़ जाती है।
 
क्रिप्टोकरेंसी एक सीमित संख्या में जेनरेट होती हैं। पिछले कुछ सालों में क्रिप्टोकरेंसी की स्वीकार्यता बढ़ी है, जिसके चलते इनकी वैल्यू भी बढ़ी है। जिस कॉइन की प्रोडक्शन लागत जितनी ज्यादा होगी, उसकी वैल्यू उतनी ज्यादा होगी। निवेशकों को ऐसे कॉइन चुनने चाहिए, जो सिक्योरिटी पर ध्यान देते हैं, भविष्य की संभावनाओं को भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।

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