टी20 वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली करारी हार ने भारतीय टीम की तैयारियों और रणनीति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हार के बाद सबसे ज्यादा चर्चा टीम की कमजोर शुरुआत को लेकर हो रही है। जब भी बड़े टूर्नामेंट की बात होती है, तो मजबूत ओपनिंग की अहमियत और बढ़ जाती है, लेकिन इस बार भारत को शुरुआत में ही झटके लगते रहे।
ओपनर अभिषेक शर्मा का प्रदर्शन इस पूरे अभियान में निराशाजनक रहा है। चार मैचों में उनके बल्ले से सिर्फ 15 रन निकले हैं। पहले तीन मुकाबलों में वह शून्य पर आउट होकर पवेलियन लौटे। एक ओपनर से उम्मीद होती है कि वह टीम को ठोस शुरुआत दे, गेंदबाजों पर दबाव बनाए और मिडिल ऑर्डर का काम आसान करे। लेकिन जब शुरुआती विकेट जल्दी गिर जाते हैं, तो पूरी बल्लेबाजी लाइनअप पर अतिरिक्त दबाव आ जाता है। यही इस टूर्नामेंट में देखने को मिला।
अभिषेक न तो आत्मविश्वास से भरे नजर आए और न ही लय में। उनकी बॉडी लैंग्वेज में झिझक साफ दिखी। बड़े शॉट खेलने की कोशिश में वह जल्दबाजी करते दिखे और टीम को मुश्किल में डालते नजर आए। ऐसे बड़े मंच पर मानसिक मजबूती बेहद जरूरी होती है, जो फिलहाल उनमें दिखाई नहीं दे रही।
— Rajabets (@rajabetsindia) February 22, 2026
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सवाल यह भी उठ रहा है कि जब लगातार असफलताएं सामने हैं, तो उन्हें बार-बार मौका क्यों दिया जा रहा है। क्या टीम मैनेजमेंट भविष्य को ध्यान में रखकर निवेश कर रहा है, या फिर विकल्पों की कमी है? जो भी हो, टूर्नामेंट जैसे अहम मंच पर प्रयोग अक्सर भारी पड़ जाते हैं।
भारतीय टीम को अगर आगे बढ़ना है, तो ओपनिंग जोड़ी को स्थिरता और भरोसेमंद प्रदर्शन देना होगा। वरना शुरुआती झटकों से उबरना हर बार संभव नहीं होगा। अब देखना यह है कि टीम प्रबंधन अगला कदम क्या उठाता है।
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