suvichar

ठुकरा रहा था मुझे बड़ी देर से ज़माना, मैं आज सब ‘जहान’ को ठुकरा के पी गया

Updated: सोमवार, 4 मई 2020 (14:24 IST)
ग़म इस कदर बढ़े कि घबरा के पी गया, इस दिल की बेबसी पे तरस खा के पी गया,
ठुकरा रहा था मुझे बड़ी देर से ज़माना, मैं आज सब जहान को ठुकरा के पी गया।

इतने महीनों से सारी दुन‍िया की मेडि‍कल र‍िसर्च टीमें नहीं कर पाई, वो अब भारत में होने वाला है। 4 मई इत‍िहास में ल‍िखा जाने वाला वो द‍िन है, जब भारत में कोरोना के वैक्‍सीन की ईजाद का ‘श्रीगणेश’ हो गया।

हो सकता है हमारे देश के शोधार्थी चीन पहुंचकर वहां की लैब का मुआयना और र‍ि‍सर्च करें। क्‍योंक‍ि वायरस की ड‍ीटेल में पहुंचकर इसे जड़ से खत्‍म करने का ऐत‍िहास‍िक ‘क्‍ल‍िन‍िकल ट्रायल’ शुरू हो चुका है।

जी हां, हमारी सरकार ने कई शहरों में शराब के ठेकों को खोलने के आदेश जारी कर द‍िए हैं। अब कोरोना से जुड़े हर सवाल का जवाब आपके अपने नजदीकी ठेके या अहाते में म‍िल जाएगा।

सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेक‍िन क्‍या आपको नहीं लगता क‍ि ज‍िन मयखानों में बैठकर कई शायरों ने बड़े-बड़े दीवान रच डाले। शायरी के मोटे-मोटे दस्‍तावेज ल‍िख डाले, क्‍या वहां बैठकर कोरोना का वैक्‍सीन ईजाद नहीं हो सकता।

यान‍ी शराब के ज‍िन शौकीनों का अब तक इत‍िहास में ति‍रस्‍कार क‍िया जाता रहा, वे अब न स‍िर्फ कोरोना का वैक्‍सीन बनाएंगे, बल्‍कि‍ अब तक गि‍र रही देश की अर्थव्‍यवस्‍था को संभालने का भी काम करेंगे। यानी उधर ठेके खुले और इधर द‍िमाग खुलना शुरू हो गए हैं।

शायद इसील‍िए ही लॉकडाउन 3.0 में ‘जान’ बच गई तो ‘जहान’ के ठेकों पर शराब के शौकीनों की भीड़ उमड़ गई है, ज‍िसे कोरोना भी नहीं रोक पाया है।

ग़म इस कदर बढ़े कि घबरा के पी गया, इस दिल की बेबसी पे तरस खा के पी गया,
ठुकरा रहा था मुझे बड़ी देर से ज़माना, मैं आज सब जहान को ठुकरा के पी गया।

आलम यह है क‍ि कर्नाटक से लेकर छत्‍तीसगढ तक मयखानों के सामने लंबी कतारें लग गई हैं। लखनऊ से लेकर हुबली और बि‍लासपुर तक ठेकों के सामने हाज‍िरी लगी हुई है। कोई सुबह 6 बजे से आकर लाइन में लग गया तो कोई च‍िलच‍िलाती धूप में अपनी बारी का इंतजार कर रहा है।

शराब के शौकीनों की ये बेबसी और बेताबी देखते ही बन रही है। लॉकडाउन के इतने द‍िन उन्‍होंने बगैर शराब के काट द‍िए, अब जैसे ही मयखाने के दरवाजे खुले, वहां शौकीनों का मजमा लगना शुरू हो गया।

इतने द‍िनों की बेबसी के बाद एक ही शेर याद आ रहा है।

आए हैं समझाने लोग, हैं कितने दीवाने लोग
दैर-ओ-हरम में चैन जो मिलता, क्यूं जाते मयखाने लोग।

बोतल खरीदने के ल‍िए शौकीन कई जगहों पर बहुत अच्‍छे से सोशल ड‍िस्‍टेंस‍िंग का पालन कर रहे हैं, जैसे मि‍ल‍िट्री का कोई रुल हो, लेक‍िन पीने के बाद इसका क‍ितना पालन हो सकेगा, कौन क‍ितना लड़खडाएगा यह देखने वाली बात होगी। हालां‍क‍ि कुछ जगहों पर बोतल खरीदने की हड़बड़ी भी नजर आई हैं।

अब कोई कुछ भी कहे इस द‍िल की लगी के बारे में, लेक‍िन पीने में कोई बुराई नहीं। यह तो आदमी को शरीफ बना देती है। बुरा तो वो शख्‍स है पीकर ज‍िसकी जबान लड़खड़ाए।

ज़ाहिद शराब पीने से काफ़िर हुआ मैं क्यूं 
क्या डेढ़ चुल्लू पानी में ईमान बह गया। 
लेखक के बारे में
नवीन रांगियाल
नवीन रांगियाल DAVV Indore से जर्नलिज्‍म में मास्‍टर हैं। वे इंदौर, भोपाल, मुंबई, नागपुर और देवास आदि शहरों में दैनिक भास्‍कर, नईदुनिया, लोकमत और प्रजातंत्र जैसे राष्‍ट्रीय अखबारों में काम कर चुके हैं। करीब 15 साल प्रिंट मीडिया में काम करते हुए उन्‍हें फिल्‍ड रिपोर्टिंग का अच्‍छा-खासा अनुभव है। उन्‍होंने अखबार.... और पढ़ें

Show comments

आरक्षण विरोधी आंदोलन पर पूर्ण प्रतिबंध क्यों? हाईकोर्ट ने लगाई दिल्ली पुलिस को फटकार, जानिए क्या है पूरा मामला

पहले 10 लाख जमा किए, IDA ने फिर मांगे 4 लाख रुपए, राहुल गांधी के इंदौर में आयोजन में फिर अड़चन

Hyundai BAYON India : नए SUV का डिजाइन आया सामने, H-Edge लाइटिंग ने खींचा ध्यान; जानें क्या-क्या हुआ कन्फर्म

Samsung Galaxy A18 4G लॉन्च, 50MP कैमरा और 5000mAh बैटरी के साथ आया फोन; जानें कीमत और फीचर्स

Suzuki e-Access खरीदें या नहीं? आराम, बैटरी और रेंज में दमदार, क्या कुछ कमियां भी हैं

सभी देखें

PM मोदी के 76वें जन्मदिन पर UP में दीपोत्सव जैसा माहौल, सीतापुर में मोदी-योगी की आकृति तो मेरठ में 'आशीर्वाद का दीया' बना आकर्षण

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और सीएम डॉ. मोहन यादव ने की सेवा-संकल्प अभियान की शुरुआत, स्वामित्व अधिकार योजना के तहत 50 लाख संपत्तियों की होगी फ्री रजिस्ट्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जगमगाया मध्यप्रदेश, शिप्रा तट-महाकाल महालोक में एक साथ जलाए गए 33.27 लाख दीये, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

UPI विवाद पर हंसराज विश्वकर्मा का राहुल गांधी-अखिलेश पर निशाना , बोले- दोनों के बीच सांठगांठ

अंबेडकरनगर में 1100 बीघा जमीन पर आकार ले रहा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, पराली से बनेगी बायो गैस

अगला लेख