Hanuman Chalisa

कोरोना के खिलाफ हर्ड इम्युनिटी की ओर अग्रसर देश की राजधानी

गुरुवार, 28 जनवरी 2021 (11:58 IST)
नई दिल्ली, पूरी दुनिया के वैज्ञानिक कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में हर्ड इम्युनिटी (सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता) को महत्वपूर्ण बता रहे हैं।

अब पता चला है कि कोविड-19 संक्रमण के खिलाफ देश की राजधानी सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने की ओर बढ़ रही है। दिल्ली में किए गए पांचवें दौर के सीरोलॉजिकल सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर विशेषज्ञों द्वारा यह बात कही जा रही है। सीरोलॉजिकल परीक्षणों से पता चला है कि इस सर्वेक्षण में शामिल 50 फीसदी से अधिक लोगों में कोविड-19 के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हुई है।

कोविड-19 के खिलाफ देश में चलाए जा रहे टीकाकरण कार्यक्रम के जरिये इसी हर्ड इम्यूनिटी (सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता) को पाने की कोशिश की जा रही है। शोधकर्ताओं का कहना है कि एंटीबॉडी से युक्त बेहतर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग कोरोना वायरस के प्रसार की श्रृंखला को तोड़कर वायरस को फैलने से रोक सकते है।
सीरोलॉजिकल सर्वेक्षण से दिल्ली के एक जिले के 50 से 60 प्रतिशत लोगों में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित होने का पता चला है। जबकि, अन्य जिलों में 50 फीसदी ऐसे लोग मिले हैं, जिनमें एंटीबॉडी पायी गई है। दिल्ली सरकार द्वारा राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के साथ मिलकर किये गए इस सर्वेक्षण में राजधानी के विभिन्न जिलों से करीब 28 हजार लोगों के नमूने लिए गए थे।

पिछले वर्ष 27 जून से 10 जुलाई के बीच किए गए पहले सीरोलॉजिकल सर्वेक्षण में 21,387 नमूनों का उपयोग किया गया था, जिससे लगभग 23 प्रतिशत लोगों के वायरस के संपर्क में होने का पता चला था। जबकि, अगस्त में यह आंकड़ा बढ़कर 29.1 प्रतिशत हो गया। हालांकि, सितंबर में लोगों के वायरस के संपर्क में होने का आंकड़ा 25.1 फीसदी था, और नवंबर के महीने में यह 25.5 फीसदी था।

उल्लेखनीय है कि आबादी में वायरस के खिलाफ विशिष्ट एंटीबॉडी की उपस्थिति का पता लगाकर बीमारी के प्रसार की जाँच करने के लिए सीरोलॉजिकल सर्वेक्षण किया जाता है। सीरोलॉजिकल परीक्षण आमतौर पर संक्रमण और ऑटोइम्यून बीमारियों के निदान के लिए किया जाता है। इसके अलावा, यह परीक्षण लोगों के समूह में किसी बीमारी के खिलाफ विकसित होने वाली प्रतिरक्षा की जांच के लिए भी किया जाता है।

यह मुख्य तौर पर एक रक्त परीक्षण होता है, जिसमें व्यक्ति के रक्त में मौजूद एंटीबॉडीज की पहचान की जाती है। विभिन्न रोगों की पहचान के लिए अलग-अलग तरह के सीरोलॉजिकल परीक्षण किये जाते हैं। हालांकि, सभी सीरोलॉजिकल परीक्षणों में एक बात समान होती है, और वो यह है कि ये सभी हमारे प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा निर्मित प्रोटीन पर फोकस करते हैं। (इंडिया साइंस वायर)

Show comments

PoK में विरोध प्रदर्शन पर MEA का बड़ा बयान, Hormuz और Pakistan को लेकर क्या है भारत का प्लान

7 Electric Scooters, कम हाइट वालों को ट्रैफिक में भी नहीं होगी परेशानी, देखें List

अब वैष्‍णो देवी चढ़ावे में घोटाला! 550 करोड़ की चांदी के गबन का आरोप

Fact Check : सेटेलाइट तकनीक से सड़क और हवा में चलने वाली बस? जानिए नितिन गडकरी के दावों का सच

WhatsApp यूजरनेम फीचर पर भारत में लगी रोक, सुरक्षा चिंताओं पर Meta ने क्या कहा

सभी देखें

ईरान और अमेरिका समझौते के रास्ते से क्यों भटक गए?

Top News 15 July: होर्मुज पर ट्रंप का बड़ा यू-टर्न, अमेरिका ने की समुद्री नाकेबंदी, राम मंदिर SIT रिपोर्ट आज

Donald Trump : ट्रंप का बड़ा यू-टर्न, होर्मुज पर 20% शुल्क का फैसला वापस, अब खाड़ी देशों से करेंगे अरबों डॉलर के निवेश सौदे

सोनम वांगचुक को मिला विपक्ष का साथ, केजरीवाल-अखिलेश ने की यह अपील, क्‍या अब तोड़ेंगे अनशन?

UPSSSC X-Ray Technician Result Out : 377 उम्मीदवारों का चयन, आयोग ने जारी की मेरिट सूची

अगला लेख