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छठ महापर्व : राशि अनुसार सूर्य का यह मंत्र शुभ है आपके लिए

शुक्रवार,नवंबर 20, 2020
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छठ पर्व पर सूर्य मंत्र का 108 बार जाप करने से अवश्य लाभ मिलता है। ये सूर्य मंत्र यश, सुख, समृद्धि, संतान, वैभव, सफलता, कीर्ति, पराक्रम, ऐश्वर्य, सौभाग्य, धन, संपदा और सुंदरता का वरदान देते हैं।
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जिन दंपत्तियों को संतान प्राप्त होने में बाधा आती है उन्हें छठ पर्व की पूजा में इस षष्ठी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
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छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए जीवन के महत्वपूर्ण अवयवों में सूर्य व जल की महत्ता को मानते हुए, इन्हें साक्षी मान कर भगवान सूर्य की आराधना तथा उनका धन्यवाद करते हुए मां गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर ( तालाब ...
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चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व को डाला छठ, छठी माई, छठ, छठ पूजा, छठ माई पूजा, सूर्य षष्ठी पूजा आदि कई नामों से जाना जाता है।
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ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान। जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा। धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।। ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।। सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।। अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण ...
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इस बार छठ पर्व 18 नवंबर से 20 नवंबर 2020 के मध्य मनाया जाएगा। छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा का प्रचलन और उन्हें अर्घ्य देने का विधान है। छठ पूजा का व्रत महिलाएं अपनी संतान की रक्षा और पूरे परिवार की सुख शांति का वर मांगाने के लिए करती ...
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देश की बहुत बड़ी आबादी इस पूजा की मौलिक बातों से अनजान है। इतना ही नहीं, जिन लोगों के घर में यह व्रत होता है, उनके मन में भी इसे लेकर कई सवाल उठते हैं। प्रस्तुत है षष्‍ठी पूजा के 16 बड़े सवाल और उनके सटीक जवाब...
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सूर्य रक्षात्मक इस स्तोत्र को भोजपत्र में लिखकर जो हाथ में धारण करता है तो संपूर्ण सिद्धियां उसके वश में होती हैं।
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छठ पर्व पर सूर्य देव की पूजा का बहुत महत्व होता है, सूर्य को इस दिन शाम को और दूसरे दिन सुबह अर्घ्य दिया जाता है। आखिर सूर्य को अर्घ्य देने से क्या होगा और क्यों देते हैं सूर्य को अर्घ्य, जानिए सूर्य को अर्घ्य देने के फायदे।
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इस बार छठ पर्व 18 नवंबर से 20 नवंबर 2020 के मध्य मनाया जाएगा। छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा का प्रचलन और उन्हें अर्घ्य देने का विधान है। आओ जानते हैं कि सार्वजनिक स्थान पर कोरोना के बढ़ते खतरे के चलते घर पर ही छठ कैसे मनाएं।
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आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ नियमित करने से अप्रत्याशित लाभ मिलता है। आदित्य हृदय स्तोत्र के पाठ से नौकरी में पदोन्नति, धन प्राप्ति, प्रसन्नता, आत्मविश्वास के साथ-साथ समस्त कार्यों में सफलता मिलती है।
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दिवाली के 6 दिन बाद छठ मनाया जाता है। छठ के महाव्रत को करना अत्यंत पुण्यदायक है। छठ व्रत सबसे महत्त्वपूर्ण रात्रि कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को होता है। सूर्योपासना का यह महापर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। छठ पर्व के लिए कई कथाएं प्रचलित हैं, किन्तु ...
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षष्ठी देवी, छठ माई या कहें कि सूर्य षष्ठी के अवसर पर पूजन में कोई भी कमी नहीं रहना चाहिए। यहां प्रस्तुत है 5 ऐसी महत्वपूर्ण सामग्री जिनके बिना पर्व की परंपरा अधूरी मानी जाती है।
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सूर्य की आराधना करते समय श्री सूर्य चालीसा का पाठ बहुत ही लाभदायी माना गया है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं सूर्य चालीसा का संपूर्ण पाठ, अवश्‍य पढ़ें...
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ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान। जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
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छठ पर्व के पीछे पौराणिक महत्व के साथ-साथ वैज्ञानिक महत्व भी छिपा हुआ है, जो कई लोग नहीं जानते। जी हां, छठ पर्व की परंपरा में बहुत ही गहरा विज्ञान छिपा हुआ है।
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इस महापर्व के लिए कई कड़े नियम तय किए गए हैं। इस पर्व के दौरान पूजन और विधि से जुड़ी कई मान्‍यताएं हैं।
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भगवती षष्ठी देवी शिशुओं की अधिष्ठात्री देवी हैं। जिन्हें संतान नहीं होती, उन्हें यह संतान देती है, संतान को दीर्घायु प्रदान करती है। बच्चों की रक्षा करना भी इनका स्वाभाविक गुण धर्म है।
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छठ महापर्व बिहार का सबसे बड़ा त्योहार है। अगर आप भी यह व्रत कर रहे हैं तो अपनी पूजा में ये 7 चीजें जरूर रखें।
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