बच्चों को अपनी मातृभाषा क्यों सीखनी चाहिए?

Last Updated: रविवार, 21 फ़रवरी 2021 (21:06 IST)
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-लेषणी मेहरा
क्या आप जानते हैं कि 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है? दरअसल, यूनेस्को (UNESCO) ने नवंबर 1999 को 21 फरवरी के दिन अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा मनाए जाने का फैसला किया था। मौखिक संचार की मूल इकाई भाषा ही है साथ ही विचारों या भावनाओं को प्रकट करने या आदान-प्रदान में भाषा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती।

मातृभाषा से तात्पर्य ऐसी भाषा से हो जो आपके घर या परिवेश में बोली जाती है। वह हिन्दी, मराठी, गुजराती, पंजाबी या फिर कोई भी भाषा हो सकती है। भाषा किसी भी संस्कृति की सबसे बड़ी संवाहक होती है। इतना ही नहीं भाषा लोगों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को समझने में मदद करती है।

कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी अपनी मातृभाषा को अच्छी तरह से जानता-समझता है तो उसके लिए अन्य भाषाएं सीखना और समझना भी आसान हो जाता है। क्योंकि इससे न सिर्फ भाषा सीखने का कौशल बल्कि साहित्यिक कौशल बढ़ाने में भी मदद मिलती है। करियर की दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण है।
अत: बच्चों को अन्य भाषाएं अवश्य सिखाएं, लेकिन उसे अपनी मातृभाषा जरूर सिखाएं। और, मातृभाषा को सीखने की शुरुआत उसके अपने घर और परिवेश से ही होती है। एक अध्ययन के मुताबिक जिन बच्चों को उनकी अपनी मूल भाषा या मातृभाषा में में पढ़ाया जाता है, उनके बारे में कहा जाता है कि उनमें आत्मसम्मान की भावना तुलनात्मक रूप से अधिक होती है। इससे पारिवारिक और सामाजिक रिश्ते भी मजबूत बनते हैं।

वर्तमान में वैश्विक स्तर पर ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं के साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं को भी काफी महत्व मिल रहा है। कह सकते हैं कि बहुभाषावाद को बढ़ावा मिल रहा है। इस बार अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का विषय भी 'शिक्षा और समाज में समावेश के लिए बहुभाषावाद को बढ़ावा देना' है।





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