बजट में कुछ छूट दे सकती है सरकार
FILE
बजट में वित्तमंत्री पी चिदंबरम वृद्धि दर व चुनावी साल की जटिलताओं को साधने की कोशिश करेंगे। चिदंबरम कल अपना आठवां बजट भाषण पढ़ेंगे तो उनके सामने देश के हर मतदाता के चेहरे पर मुस्कुराहट देखने की बड़ी चुनौती होगी। इसके इतर उन्हें घटती वृद्धि दर पर काबू पाने तथा राजकोषीय घाटे को 4.8 प्रतिशत पर नियंत्रित करने की जमीनी वास्तविकताओं से भी जूझना होगा।
इससे पहले मोरारजी देसाई ने ही आठ बार आम बजट पेश किया था। देश में आम चुनाव अगले साल अप्रैल-मई में होने हैं, इसलिए यह इस सरकार का अंतिम पूर्ण आम बजट होगा। अगले आम चुनावों से पहले तो अंतरिम बजट ही पेश किया जा सकेगा।
चिदंबरम को बजट में सरकार के चुनावी वायदों को पूरा करने के लिए योजनाओं तथा कार्यक्रमों के लिए धन का प्रावधान भी करना होगा, जिनमें खाद्य सुरक्षा विधेयक विशेष उल्लेखनीय है।
उल्लेखनीय है कि बजट से पहले बुधवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में धनाढ्यों (सुपर रिच) पर कर लगाने का समर्थन नहीं किया गया है, बल्कि इसमें कहा गया है कि सरकार को कर आधार को व्यापक बनाना चाहिए। हालांकि इस बारे में अंतिम फैसला चिदंबरम को ही करना है।
जहां तक वेतनभोगियों का सवाल है उन्हें आयकर छूट सीमा में बढ़ोतरी के रूप में कुछ राहत मिलने की संभावना है। यह छूट सीमा फिलहाल दो लाख रुपए है। संसद की स्थाई समिति (वित्त) ने सुझाव दिया है कि इस सीमा को बढ़ाकर तीन लाख रुपए किया जाना चाहिए।
चिदंबरम व्यक्तिगत निवेशकों को शेयर बाजारों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के लिए राजीव गांधी इक्विटी बचत योजना जैसी योजनाओं में बदलाव कर सकते हैं। चिदंबरम के समक्ष मुख्य काम घटती वृद्धि दर पर नियंत्रण पाना है। इसके अलावा संकुचित होते औद्योगिक उत्पादन पर भी मंत्री का ध्यान होगा।
समीक्षा में संकेत दिया गया है कि अगले वित्त वर्ष में वृद्धि दर 6.1-6.7 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है। वित्तमंत्री कर तथा गैर कर राजस्व बढ़ाने तथा व्यय में कटौती के लिए कदमों की घोषणा कर सकते हैं ताकि राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखा जा सके।
चालू वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटे के 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। चिदंबरम ने अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे में और कमी लाने का प्रस्ताव किया है। (भाषा)

