ढूँढते रह जाओगे
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निर्देशक : उमेश शुक्ला
संगीत : साजिद-वाजिद
कलाकार : सोनू सूद, सोहा अली खान, कुणाल खेमू, परेश रावल, दीपल शॉ, जॉनी लीवर, असरानी
आनंद पवार (कुणाल खेमू) चार्टर्ड अकाउंटेंट है, तो राज चोपड़ा (परेश रावल) फिल्म निर्माता। वे बाजार से पैसा उठाकर कम रुपए में फ्लॉप फिल्म बनाने की योजना बनाते हैं ताकि बचा हुआ धन अपनी जेब में रख सकें। लेकिन इसके पहले की वे योजना को साकार कर सकें, दोनों के बीच विवाद हो जाता है।
इसी बीच आनंद नौकरी से हाथ धो बैठता है और उसकी गर्लफ्रेंड नेहा भी उससे संबंध तोड़ लेती है। आनंद एक बार फिर राज के पास जाता है और कहता है कि उस योजना पर वे फिर काम कर सकते हैं।
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आनंद को राज उसकी एक्स गर्लफ्रेंड नेहा को फिल्म में लेने की सलाह देता है क्योंकि उसे अभिनय का शौक है। साथ ही वह आनंद की जिंदगी में एक बार फिर आ जाएगी। आर्यन के साथ फिल्म करने के लिए नेहा मान जाती है।
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आनंद और राज के दुर्भाग्य से वो फिल्म बहुत बड़ी हिट साबित होती है। राज और आनंद को पैसा देने वाले मुनाफे में अपना हिस्सा माँगते हैं। इसके बाद शुरू होता है आनंद और राज के मुसीबतों का सिलसिला, जिसे हास्य भरे अंदाज में दिखाया गया है।
