जग्गु दादा से 'बॉलीवुड के भिडू' तक: चाल की तंग गलियों से निकलकर कैसे बने जैकी श्रॉफ सुपरस्टार?
बॉलीवुड के चहेते और बिंदास अभिनेता जैकी श्रॉफ आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। 1 फरवरी 1957 को जन्मे जैकी 69 वर्ष के हो गए हैं। 'जग्गु दादा' के नाम से मशहूर जैकी का असली नाम जयकिशन काकुभाई श्रॉफ है। उनका जीवन किसी फिल्मी कहानी जैसा ही उतार-चढ़ाव भरा रहा है।
जैकी श्रॉफ का बचपन मुंबई के वालकेश्वर इलाके में 'तीन बत्ती' की एक चाल में बीता। वे वहां के लोकल 'दादा' हुआ करते थे। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने कुछ विज्ञापनों में मॉडलिंग की। लेकिन उनकी किस्मत तब बदली जब महान अभिनेता देवानंद की नज़र उन पर पड़ी। फिल्म 'स्वामी दादा' (1982) की शूटिंग के दौरान भीड़ में खड़े जैकी को देव साहब ने खुद बुलाया और एक छोटा सा रोल दे दिया।
जब सुभाष घई को मिला अपना 'हीरो'
जैकी की रफ-एंड-टफ छवि ने सुभाष घई का ध्यान खींचा। 1983 में फिल्म 'हीरो' रिलीज हुई और रातों-रात जैकी श्रॉफ सुपरस्टार बन गए। हालांकि फिल्म में उनका किरदार एक 'मवाली' का था, लेकिन उनकी मासूमियत और स्टाइल ने दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके बाद 'राम लखन' और 'कर्मा' जैसी फिल्मों में अनिल कपूर के साथ उनकी जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया।
शेफ बनना चाहते थे, बन गए अभिनेता
बहुत कम लोग जानते हैं कि जैकी श्रॉफ को खाना बनाने का बहुत शौक है। वे कभी ताज होटल में शेफ के तौर पर काम सीखना चाहते थे, लेकिन शैक्षणिक डिग्री न होने के कारण उन्हें वहां मौका नहीं मिला। आज भी बॉलीवुड में उनके हाथ का बना 'बैंगन का भर्ता' बेहद मशहूर है।
अवॉर्ड्स और उपलब्धियां
परिन्दा (1989): इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर का 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेता' पुरस्कार मिला।
रंगीला और 1942 ए लव स्टोरी: इन फिल्मों के लिए उन्हें 'सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता' का सम्मान मिला।
जैकी ने केवल हिंदी ही नहीं, बल्कि गुजराती, तमिल, बंगाली, मराठी सहित 10 भाषाओं में 200 से अधिक फिल्मों में काम किया है। आज भी जैकी श्रॉफ उसी सादगी और ऊर्जा के साथ काम कर रहे हैं। वे अक्सर अपने हाथ में एक छोटा पौधा लिए नजर आते हैं, जो पर्यावरण के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है।