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उर्वशी रौतेला का छोटा रोल चर्चा में, क्या बॉलीवुड में बने रहने की यही रणनीति है?

उर्वशी को आखिर मिला क्या?
'वेलकम टू जंगल' में उर्वशी रौतेला की मौजूदगी जितनी छोटी थी, उसके बाद शुरू हुई बहस उतनी ही बड़ी है। फिल्म में वे महज कुछ सेकंड के लिए नजर आती हैं और अक्षय कुमार के साथ उनका एक सिम्बॉलिकल किसिंग शॉट चर्चा का विषय बन गया। सवाल अब यह नहीं है कि उनका स्क्रीन टाइम कितना था, बल्कि यह है कि क्या इतनी कम भूमिका किसी स्थापित चेहरे के लिए सही फैसला है या फिर यह बॉलीवुड में अपनी मौजूदगी बनाए रखने की एक व्यावहारिक रणनीति है?
 
उर्वशी रौतेला लंबे समय से बॉलीवुड का जाना-पहचाना चेहरा हैं। उनकी खूबसूरती की चर्चा अक्सर होती है, लेकिन हिंदी फिल्मों में उन्हें उतने अवसर नहीं मिले, जितनी उम्मीद उनके करियर की शुरुआत में की गई थी। यही वजह है कि जब भी वे किसी फिल्म में दिखाई देती हैं, लोगों की नजर सबसे पहले उनके रोल की अहमियत पर जाती है।
 
हाल ही में रिलीज हुई 'वेलकम टू जंगल' इसका ताजा उदाहरण है। फिल्म में उनकी उपस्थिति इतनी सीमित है कि दर्शक उन्हें कुछ ही सेकंड तक देख पाते हैं। अक्षय कुमार के साथ उनका सिम्बॉलिकल किसिंग शॉट जरूर लोगों का ध्यान खींचता है, लेकिन इसके बाद उनका किरदार कहानी में कोई बड़ा असर छोड़ता नजर नहीं आता। यही बात सोशल मीडिया पर बहस की वजह बन गई।
 
कई लोगों का मानना है कि जिस अभिनेत्री की अपनी पहचान हो, उसे इतने छोटे और लगभग महत्वहीन रोल स्वीकार नहीं करने चाहिए। आखिर ऐसे किरदार से न अभिनय क्षमता सामने आती है और न ही दर्शकों के मन में कोई स्थायी छाप बनती है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कुछ सेकंड के स्क्रीन टाइम से किसी कलाकार के करियर में वास्तव में कोई बड़ा बदलाव आता है?
 
दूसरी ओर फिल्म इंडस्ट्री की वास्तविकता भी अलग है। बॉलीवुड में लगातार दिखाई देना भी एक तरह की उपलब्धि माना जाता है। लंबे समय तक पर्दे से गायब रहने पर कलाकारों को अक्सर भुला दिया जाता है। ऐसे में यदि कोई अभिनेत्री छोटी भूमिका के जरिए भी चर्चा में बनी रहती है, तो इसे पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता। कई बार स्क्रीन टाइम से ज्यादा मायने यह रखता है कि दर्शकों को आपकी मौजूदगी याद रहे।
 
उर्वशी रौतेला का करियर भी फिल्मों से ज्यादा उनकी ग्लैमरस लाइफस्टाइल, महंगी ड्रेसेस, कीमती गहनों और परदे के बाहर की गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में रहा है। अक्सर उनकी चर्चा किसी फिल्मी किरदार की बजाय उनके सार्वजनिक जीवन को लेकर होती है। ऐसे में फिल्म में कुछ सेकंड की मौजूदगी भी उनके नाम को फिर से चर्चा में ले आती है।
 
हालांकि, एक कलाकार की असली पहचान अंततः उसके अभिनय से बनती है। खूबसूरती और लोकप्रियता लंबे समय तक दर्शकों को आकर्षित कर सकती है, लेकिन यादगार सफर वही तय करते हैं जिनके हिस्से मजबूत किरदार आते हैं। इसलिए उर्वशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती चर्चा में बने रहना नहीं, बल्कि ऐसा रोल हासिल करना है जो उनके अभिनय को भी पहचान दिला सके।
 
'वेलकम टू जंगल' में उर्वशी रौतेला का छोटा रोल एक नई बहस छोड़ गया है। इसे कोई मजबूरी कह रहा है तो कोई समझदारी। सच शायद इन दोनों के बीच कहीं है। बॉलीवुड में बने रहने के लिए छोटी भूमिका स्वीकार करना गलत नहीं माना जा सकता, लेकिन अगर करियर को नई दिशा देनी है तो अब उन्हें ऐसे किरदारों की जरूरत होगी, जो केवल कुछ सेकंड नहीं बल्कि पूरी फिल्म में उनकी मौजूदगी का एहसास कराएं।
 
लेखक के बारे में
समय ताम्रकर
समय ताम्रकर फिल्म समीक्षक हैं, जो फिल्म, कलाकार, निर्देशक, बॉक्स ऑफिस और फिल्मों से जुड़े पहलुओं पर गहन विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं।.... और पढ़ें