'शकुंतला देवी' के 6 साल: जब विद्या बालन ने एक ही किरदार में प्रतिभा के साथ मां और उसकी भावनाओं को निभाया खूबसूरती से
फिल्म 'शकुंतला देवी' को रिलीज हुए छह साल हो चुके हैं, लेकिन विद्या बालन का इस मशहूर गणितज्ञ का किरदार आज भी उनके बेहतरीन अभिनय में गिना जाता है। उन्होंने शकुंतला देवी को सिर्फ उनकी असाधारण गणितीय प्रतिभा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उनके व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं को भी पर्दे पर दिखाया।
एक बेबाक और आत्मविश्वासी महिला, दुनिया भर में पहचान बनाने वाली शख्सियत, अपनी अलग सोच रखने वाली इंसान और अपनी बेटी के साथ रिश्ते को समझने की कोशिश करती एक मां, विद्या बालन ने इन सभी पहलुओं को बेहद स्वाभाविक तरीके से निभाया।
इस किरदार की सबसे खास बात यह है कि विद्या बालन ने शकुंतला देवी के सार्वजनिक और निजी जीवन के बीच बहुत अच्छा संतुलन बनाया। एक तरफ जहां वह मंच पर पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखती हैं और अपने मजाकिया अंदाज से सभी का दिल जीत लेती हैं, वहीं दूसरी तरफ बेटी के साथ अपने रिश्ते में उनकी असुरक्षा, पछतावा और भावनात्मक उलझन भी दिखाई देती है। इन दोनों पहलुओं के बीच विद्या का बदलाव इतना सहज था कि कहीं भी अभिनय बनावटी नहीं लगा।
गौरतलब है कि विद्या ने इस किरदार में गर्मजोशी और सहजता भी बनाए रखी। शकुंतला देवी की सफलता हो या उनके जीवन में आने वाली मुश्किलें, हर भावना पर्दे पर सच्ची लगती है। उन्होंने एक महान प्रतिभा को सिर्फ आदर्श बनाकर पेश करने की बजाय उस महिला को दिखाया, जो अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती थी। वह अपनी सोच के लिए खड़ी होती थीं, समाज की तय सीमाओं को चुनौती देती थीं और अपने फैसलों की जिम्मेदारी भी लेती थीं।
यही वजह है कि उनकी यह भावनात्मक सच्चाई इस फिल्म को एक सामान्य बायोपिक से आगे ले जाती है। विद्या ने शकुंतला देवी की उपलब्धियों के साथ-साथ उनकी कमजोरियों, रिश्तों और भावनाओं को भी उतनी ही अहमियत दी। इसी वजह से दर्शक सिर्फ उनकी प्रतिभा से प्रभावित नहीं होते, बल्कि उनके इंसानी पहलू से भी जुड़ते हैं। यह फिल्म याद दिलाती है कि महान किरदार सिर्फ अपनी उपलब्धियों की वजह से याद नहीं रहते, बल्कि उनकी इंसानियत उन्हें खास बनाती है।

