Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

थ्रेडिंग के बाद त्वचा पर दाने निकल आते है? तो आजमाएं ये 5 घरेलू नुस्खे

कई महिलाओं की त्वचा थ्रेडिंग करवाने के बाद लाल हो जाती है तो किसी को त्वचा पर दाने उभर आते हैं साथ ही जलन और दर्द भी होता है। थ्रेडिंग के बाद होने वाली ऐसी ही समस्याओं को दूर करने के लिए हम आपको बता रहे हैं 5 घरेलू नुस्खे, जो आपको जरूर आजमाना चाहिए -
 
1 खीरा :
थ्रेडिंग करवाने के बाद जलन वाली जगह पर करीब 2-3 मिनट तक खीरे को रहें। इसकी ठंडी तासीर से जलन वाली जगह पर जल्द ही राहत मिलेगी।
 
2 गुलाब जल :
थ्रेडिंग के बाद अक्सर लोगों की त्वचा पर लालीमा आ जाती है। इसे दूर करने के लिए गुलाब जल लगाएं। गुलाब जल त्वचा के दाने भी ठीक करने में मददगार होता हैं।

ALSO READ: सीढ़ियां चढ़ते हुए होता है मांसपेशियों में खिंचाव? तो जानिए राहत पाने के 5 उपाय
 
3 कच्चा दूध :
दूध का चेहरे पर इस्तेमाल करने से त्वचा का रूखापन दूर हो जाता है। उसी तरह थ्रेडिंग के बाद भी आपकी त्वचा रूखी हो जाती है, ऐसे में कच्चे दूध को रूई की मदद से अपनी आईब्रो के आस-पास लगा लें। इससे फर्क आपको खुद महसूस होगा।
 
4 चंदन :
चंदन भी त्वचा को कई फायदे देता है। आप थ्रेडिंग के बाद चंदन का लेप लगा सकती हैं, इससे जलन और दर्द कम हो जाता है।
 
5 बर्फ :
कई बार थ्रेडिंग करवाने के बाद त्वचा पर दाने निकल आते हैं। ऐसे में आप अगर उस जगह पर बर्फ लगाएंगी तो इससे आपके दाने बैठ जाएंगे और जलन भी कम हो जाएगी।
 
 

Show comments

सभी देखें

नशे की लत से उबरने के लिए कौनसी थेरेपी और कदम होते हैं सबसे असरदार

बारिश के मौसम में जरूर पिएं ये 5 हेल्दी ड्रिंक्स, शरीर को देंगे इम्युनिटी, एनर्जी और अंदरूनी गर्माहट

डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय, मच्छरों से ऐसे करें खुद की सुरक्षा

Hiccups Relief Tips: बार-बार हिचकी क्यों आती है? जानें कारण और आसान उपचार

बरसात के मौसम में ये 5 आसान योगासन कर सकते हैं आपकी इम्युनिटी की रक्षा

सभी देखें

घर पर BP चेक करते समय न करें ये गलतियां, जानें ब्लड प्रेशर नापने का सही तरीका

स्वामी विवेकानंद पुण्यतिथि विशेष: एक ज्योति जो आज भी भारत का पथ आलोकित कर रही है

Daily Vastu Tips: घर में हर दिन खुश रहना है तो आज ही अपनाएं ये सरल वास्तु टिप्स

पुण्यतिथि विशेष: स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय और खास बातें

तीखा सामाजिक-आर्थिक व्यंग्य: दो जून की रोटी

अगला लेख